राजाजी टाइगर रिजर्व में मंत्री पुत्र की शादी पर बवाल, वन नियमों पर उठे सवाल

पार्क में लगा पंडाल उखाड़ा, मंदिर समिति के खिलाफ दर्ज हुए रिपोर्ट
उत्तराखंड के जंगलों के बीच बसी आस्था की एक शांत जगह अचानक सियासी और पर्यावरणीय विवाद का केंद्र बन गई। राजाजी टाइगर रिजर्व के संवेदनशील रिजर्व फॉरेस्ट में कैबिनेट मंत्री खजान दास के बेटे की शादी की तैयारियों ने ऐसा तूफान खड़ा कर दिया, जिसने वन नियमों, प्रशासनिक अनुमति और प्रभावशाली लोगों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हरिद्वार रेंज के सुरेश्वरी देवी मंदिर परिसर में भारी वाहनों की आवाजाही, भव्य तैयारियों और पर्यावरणीय संवेदनशीलता के बीच इस आयोजन ने अब एक बड़े विवाद का रूप ले लिया है।
हरिद्वार के राजाजी टाइगर रिजर्व के आरक्षित वन क्षेत्र में आयोजित एक शादी समारोह को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राज्य के कैबिनेट मंत्री खजान दास के बेटे की शादी हरिद्वार रेंज स्थित सुरेश्वरी देवी मंदिर परिसर में कराने की तैयारी पर स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों ने कड़ी आपत्ति जताई है।
मामला तब गरमाया जब शनिवार को शादी की तैयारियों के लिए ट्रकों और भारी वाहनों के जरिए पंडाल, सजावट, खानपान और अन्य सामग्री जंगल क्षेत्र के भीतर पहुंचाई गई। आरोप है कि संवेदनशील वन क्षेत्र में बड़े स्तर पर गतिविधियां बिना स्पष्ट अनुमति के की जा रही थीं, जिससे वन नियमों के उल्लंघन की आशंका जताई गई।
संवेदनशील जोन में आयोजन पर सवाल
यह इलाका हाथी, गुलदार सहित कई वन्यजीवों की आवाजाही वाला संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। ऐसे में भारी वाहनों की आवाजाही, तेज रोशनी, ध्वनि और भीड़भाड़ से वन्यजीवों पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका व्यक्त की गई। जानकारों का कहना है कि सामान्य दिनों में भी मंदिर में सीमित संख्या में श्रद्धालुओं को तय प्रक्रिया के तहत ही प्रवेश मिलता है, ऐसे में बड़े आयोजन पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
प्रशासन ने हटवाया पंडाल, दर्ज हुआ मामला
विवाद बढ़ने के बाद राजाजी टाइगर रिजर्व प्रशासन हरकत में आया और मंदिर परिसर से पंडाल व अन्य सामग्री हटवा दी गई। साथ ही मंदिर समिति के कुछ पदाधिकारियों के खिलाफ वन अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।
मंत्री की सफाई, बोले—जानकारी नहीं दी गई
विवाद के बीच मंत्री खजान दास स्वयं मंदिर पहुंचे और सीमित रूप से शादी की रस्में संपन्न कराई गईं। उन्होंने कहा कि वह लंबे समय से मंदिर में आस्था रखते हैं और बेटे की शादी वहीं करने की इच्छा थी। उनके अनुसार, उन्हें यह जानकारी नहीं दी गई कि इस प्रकार के आयोजन के लिए विशेष अनुमति आवश्यक है।
मंत्री ने यह भी दावा किया कि पहले अधिकारियों से बातचीत के दौरान आयोजन को लेकर सकारात्मक संकेत मिले थे। साथ ही उन्होंने पूरे मामले को राजनीतिक साजिश बताते हुए कहा कि यदि नियमों की जानकारी पहले दी जाती, तो आयोजन कहीं और किया जाता।
मंदिर समिति ने भी दी सफाई
मंदिर समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि आयोजन को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया। उनके अनुसार, यह केवल पूजा और भंडारे तक सीमित कार्यक्रम था, न कि कोई भव्य समारोह।
जांच के आदेश, आगे की कार्रवाई पर नजर
पीसीसीएफ रंजन मिश्रा का कहना है कि पार्क का कोर होने के कारण मंदिर में किसी तरह का कोई भव्य आयोजन नहीं हो सकता। कोर फॉरेस्ट क्षेत्र में किसी भी प्रकार के बड़े आयोजन की अनुमति नहीं होती। मामले की जांच शुरू कर दी गई है और अब सबकी नजर इस पर है कि प्रशासन आगे क्या कार्रवाई करता है।



