पृथ्वी पर जल बहुत पर पीने योग्य बेहद कम: डॉ. दीक्षित
विश्व जल दिवस पर संदेश: पानी बचाएं, भविष्य बचाएं

“विश्व जल दिवस पर गोष्ठी का आयोजन, जल संरक्षण का संदेश”
देहरादून। विश्व जल दिवस के अवसर पर इतिहास संकलन समिति द्वारा जल संरक्षण विषय पर एक जागरूकता गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जल के महत्व, संरक्षण और इसके समान वितरण पर विस्तार से चर्चा की गई।
गोष्ठी में डॉ. अनिल कुमार दीक्षित (विधि प्रोफेसर, उत्तरांचल यूनिवर्सिटी) ने बताया कि पृथ्वी पर उपलब्ध जल का बहुत ही छोटा हिस्सा ही पीने योग्य है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 के लिए विश्व जल दिवस की थीम “जल और लैंगिक समानता” रखी गई है, जिसका उद्देश्य जल की कमी के कारण होने वाले भेदभाव को समाप्त करना है। उन्होंने चिंता जताई कि आज स्वच्छ पानी बोतलों में बिक रहा है, जो गरीबों की पहुंच से दूर होता जा रहा है।
मुख्य वक्ता डॉ. सुशील सिंह ने अपने संबोधन में कहा, “जल ही जीवन है,” और इसका अर्थ है कि जहां पानी है, वहीं जीवन संभव है। उन्होंने कहा कि पूरे ब्रह्मांड में पृथ्वी ही एकमात्र ग्रह है जहां जल उपलब्ध है, इसलिए हमें इसका संरक्षण करना चाहिए और अनावश्यक बर्बादी से बचना चाहिए।
समिति की अध्यक्षा मीना तिवारी ने कहा कि जल जीवन का आधार है और इसके बिना पृथ्वी पर जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। उन्होंने बताया कि जल न केवल पीने के लिए बल्कि कृषि, स्वच्छता और पर्यावरण संतुलन के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। यह शरीर के तापमान को नियंत्रित करता है, पोषक तत्वों का संचार करता है और पारिस्थितिकी तंत्र को जीवित बनाए रखता है।
गोष्ठी में सुनील तिवारी, कुमारी प्रियंका, रितेश गुप्ता, माया देवी, मनु द्विवेदी और सागर सक्सेना सहित कई समाजसेवक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में मनीष सिंह ने सभी उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया।



