रामपुर तिराहा गोलीकांड: हाईकोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित
30 साल बाद भी न्याय अधूरा, कोर्ट ने यूपी सरकार से मांगी केसों की स्थिति

कोर्ट ने यूपी सरकार से मांगी केसों की स्थिति; 7 महिलाओं से दुष्कर्म और कई आंदोलनकारियों पर अत्याचार का आरोप, सुनवाई अब तक लंबित
नैनीताल/देहरादून। उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान हुए बहुचर्चित मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा गोलीकांड मामले में सोमवार को नैनीताल हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की एकलपीठ ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा कि इस मामले में दर्ज छह मुकदमे किस अदालत में चल रहे हैं और उनकी वर्तमान स्थिति क्या है। इस पर यूपी सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि मुख्य आरोपी रहे तत्कालीन डीएम अनंत कुमार सिंह से संबंधित मुकदमे की वर्तमान स्थिति और वह किस कोर्ट में लंबित है, इसका रिकॉर्ड उनके पास उपलब्ध नहीं है।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि मुकदमे दर्ज होने के बाद से इन मामलों में कोई प्रभावी सुनवाई नहीं हो सकी है। इस गोलीकांड को लगभग 30 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन मुकदमों की स्थिति आज भी स्पष्ट नहीं हो पाई है।
जानकारी के अनुसार, देहरादून के जिला जज ने नैनीताल हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के पत्र के आधार पर इन मुकदमों को सुनवाई के लिए मुजफ्फरनगर कोर्ट भेजा था। इसके बाद से इन मामलों में सुनवाई लंबित बताई जा रही है।
राज्य आंदोलनकारी और अधिवक्ता रमन शाह ने बताया कि रामपुर तिराहा कांड के दौरान सात महिला आंदोलनकारियों के साथ दुष्कर्म हुआ था, जबकि 17 अन्य आंदोलनकारियों को प्रताड़ित किया गया था। मामले में मुख्य आरोपी तत्कालीन डीएम अनंत कुमार सिंह समेत सात अन्य आरोपियों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को सीबीआई ने मुजफ्फरनगर कोर्ट में स्थानांतरित किया था, लेकिन आज तक इनकी सुनवाई पूरी नहीं हो सकी।
उन्होंने बताया कि राज्य आंदोलनकारियों की ओर से इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की गई थी, जिसके बाद यह प्रकरण नैनीताल हाईकोर्ट स्थानांतरित किया गया।
2 अक्टूबर 1994 की घटना
2 अक्टूबर 1994 को अलग राज्य बनाने की मांग को लेकर दिल्ली जा रहे आंदोलनकारियों को मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा में पुलिस ने रोक लिया था। इस दौरान पुलिस ने आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज और फायरिंग की, जिसमें कई लोगों की मौत हो गई। वहीं महिला आंदोलनकारियों के साथ दुर्व्यवहार और दुष्कर्म के गंभीर आरोप भी लगे थे।
इस घटना ने लोगों को झकझोर कर रख दिया था। बाद में कोर्ट के आदेश पर मामले की सीबीआई जांच कराई गई। हालांकि, तत्कालीन डीएम अनंत कुमार सिंह के खिलाफ राज्यपाल से अभियोजन की अनुमति न मिलने के कारण उन्हें राहत मिल गई थी।
सीबीआई ने इस मामले में हत्या, घातक हथियारों से हमला और फायरिंग कर गंभीर चोट पहुंचाने जैसी विभिन्न धाराओं में मुकदमे दर्ज किए थे। लेकिन विभिन्न कारणों के चलते इन मामलों की सुनवाई अब भी लंबित है।
सोमवार को हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता, राज्य सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और सीबीआई का पक्ष सुनने के बाद मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।




