
देहरादून। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर इतिहास संकलन समिति द्वारा आयोजित एक गोष्ठी में उत्तरांचल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. अनिल कुमार दीक्षित ने कहा कि “सबका साथ, सबका विकास” की अवधारणा को साकार करने के लिए महिला सशक्तिकरण की दिशा में जागरूकता के साथ-साथ ठोस मदद की भी आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि भारत में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए आज भी कई चुनौतियों से जूझना पड़ रहा है। पितृसत्तात्मक सोच, सुरक्षा के मुद्दे, घरेलू हिंसा, भ्रूण हत्या और उत्पीड़न जैसी समस्याएं अभी भी समाज में मौजूद हैं। डॉ. दीक्षित ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि देश में श्रमबल में महिलाओं की भागीदारी केवल 18 प्रतिशत है। विश्व असमानता रिपोर्ट 2024 के अनुसार श्रम आय में पुरुषों की हिस्सेदारी 82 प्रतिशत जबकि महिलाओं की हिस्सेदारी मात्र 18 प्रतिशत है। इसके अलावा देश में 90 प्रतिशत से अधिक महिलाएं असंगठित क्षेत्र में कार्यरत हैं, जहां उन्हें अक्सर कम वेतन और असुरक्षित परिस्थितियों में काम करना पड़ता है।
कार्यक्रम में संबोधित करते हुए सुनील तिवारी ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की मुख्य थीम ‘Give To Gain’ (दान से लाभ) है, जो लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिए संसाधनों, समर्थन और अवसरों को साझा करने पर केंद्रित है।
इस अवसर पर सुश्री सुधा कुमारी, डॉ. अर्चना, सुधीर कुमार, कृष्ण कुमार और सज्जन सिंह सहित कई लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में समिति की ओर से श्रमिक महिलाओं को खाद्य सामग्री भी वितरित की गई।




