
देशभर के समस्त 61 कैंटोनमेंट बोर्डों के नामित सदस्यों का कार्यकाल एक वर्ष के लिए बढ़ाते हुए अब इसे 10 फरवरी 2027 तक कर दिया है। इस फैसले के साथ ही छावनी क्षेत्रों में चुनाव कराए जाने की संभावना फिलहाल समाप्त हो गई है और प्रशासनिक व्यवस्था पूर्ववत नामित प्रतिनिधियों के माध्यम से ही संचालित होगी।
ज्ञात हो कि कैंट बोर्डों के निर्वाचित सदस्यों का कार्यकाल 22 अक्टूबर 2021 को समाप्त हो गया था। इसके बाद रक्षा मंत्रालय ने प्रत्येक बोर्ड में स्थानीय बोर्डों और जीओसी मध्य कमांड, लखनऊ द्वारा भेजे गए तीन नामों के पैनल में से एक सदस्य को “नामित प्रतिनिधि” के रूप में नियुक्त किया था। तभी से देशभर के सभी कैंट बोर्ड निर्वाचित प्रतिनिधियों के बिना ही कार्य कर रहे हैं।
ताजा आदेश के अनुसार, वर्तमान में कार्यरत सभी नामित सदस्यों का कार्यकाल अब अगले वर्ष फरवरी 2027 तक मान्य रहेगा। इसका अर्थ यह है कि छावनी क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को अभी और समय तक चुनाव के माध्यम से अपने प्रतिनिधि चुनने का अवसर नहीं मिलेगा।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यह विस्तार छावनी क्षेत्रों के पुनर्गठन, नागरिक इलाकों के विलय और कानूनी सुधार प्रक्रियाओं के चलते किया गया है, ताकि व्यवस्थागत निरंतरता बनी रहे। हालांकि, स्थानीय नागरिक समूह और सामाजिक संगठन इस फैसले को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि निर्वाचित प्रतिनिधियों के अभाव में लोकतांत्रिक भागीदारी और जवाबदेही प्रभावित हो रही है।
कैंट बोर्ड नगर निकायों की तरह ही स्वच्छता, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं की जिम्मेदारी संभालते हैं। ऐसे में चुनाव न होने से आम नागरिकों की सीधी भागीदारी सीमित हो जाती है।
अब सभी की निगाहें रक्षा मंत्रालय के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या फरवरी 2027 के बाद छावनी क्षेत्रों में चुनाव की प्रक्रिया बहाल की जाएगी या नामित व्यवस्था को आगे भी जारी रखा जाएगा।



