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हनुमान मंदिर में घूमने वाला ‘भैरव’ नोएडा में लड़ रहा है जिंदगी की जंग

गांव नंदपुर में सोशल मीडिया पर वायरल ‘भैरव’ के स्वास्थ्य लाभ के लिए भंडारा

उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के गांव नंदपुर स्थित मंदिर में हनुमान जी और अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियों की एक सप्ताह तक लगातार परिक्रमा करने वाला कुत्ता भैरव इन दिनों आस्था और करुणा का प्रतीक बन गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस कुत्ते का नाम ग्रामीणों ने प्यार से ‘भैरव’ रखा है। तबीयत बिगड़ने के बाद उसे इलाज के लिए नोएडा के सेक्टर-135 स्थित शिवालय एनिमल सेंटर में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत में सुधार बताया जा रहा है।

भैरव के जल्द पूर्ण रूप से स्वस्थ होने की कामना के लिए मंगलवार को गांव नंदपुर के मंदिर परिसर में एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। भंडारे का शुभारंभ भाजपा के क्षेत्रीय मंत्री अनूप वाल्मीकि ने फीता काटकर किया। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु मौजूद रहे। मंदिर परिसर में मेले जैसा माहौल रहा और लोगों ने हवन-पूजन के माध्यम से भैरव के स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना की।

मंदिर की व्यवस्था देख रहे तुषार सैनी,और हिमांशु सैनी ने बताया कि भैरव की सलामती के लिए लगातार विशेष पूजा-अर्चना की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक भैरव पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो जाता, तब तक टीम उसे वापस गांव नंदपुर नहीं लाएगी।

दो दिन पहले भैरव का मंदिर में हनुमान जी और अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियों की लगातार परिक्रमा करते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। लोगों द्वारा हटाने की कोशिश के बावजूद वह अपनी जगह से नहीं हटा, जिससे यह दृश्य आस्था का केंद्र बन गया। हालांकि, इस असामान्य व्यवहार को देखकर पशु चिकित्सकों ने इसे किसी बीमारी का संकेत माना।

शिवालय एनिमल सेंटर के संस्थापक संजय महापात्र ने डॉक्टरों की टीम के साथ भैरव के इलाज की पहल की। इसी दौरान एम्स छत्तीसगढ़ की डॉ. सुष्मिता डे और बिजनौर की एक संस्था की संचालिका संध्या रस्तोगी ने भी संपर्क कर सहयोग दिया। इसके बाद सेंटर की टीम 18 जनवरी को बिजनौर पहुंची और भैरव को इलाज के लिए नोएडा ले आई।

संजय महापात्र के अनुसार, प्रारंभिक जांच में भैरव को डिहाइड्रेशन, आंतों में सूजन और हृदय गति कम होने जैसी समस्याएं पाई गईं। फिलहाल उसकी हालत में सुधार है और डॉक्टरों की निगरानी में इलाज जारी है। दो दिन बाद भैरव को बिजनौर वापस भेजा जाएगा और इसके बाद 15 दिनों तक उसकी सेहत पर विशेष नजर रखी जाएगी।

भैरव की यह कहानी न केवल आस्था का प्रतीक बन गई है, बल्कि यह पशु-कल्याण और मानवीय संवेदनशीलता का भी संदेश दे रही है। ग्रामीणों की प्रार्थनाएं और डॉक्टरों की मेहनत मिलकर एक जीवन को नई उम्मीद दे रही हैं।

 

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