
घर में कत्ल, नदी में शव, सीसीटीवी डिलीट: बेटी की हत्या में रिटायर्ड दरोगा की पूरी साजिश बेनकाब
जिस बेटी को पिता ने दुनिया दिखाई थी, उसी पिता ने सामाजिक बदनामी के डर में उसकी सांसें छीन लीं।प्रेमी से सामाजिक तरीके से शादी करने की जिद बेटी के लिए जानलेवा साबित हुई। रिटायर्ड दरोगा पिता ने ही घर के भीतर दुपट्टे से गला घोंटकर बेटी की हत्या कर दी। दिल दहला देने वाली बात यह रही कि छटपटाती बेटी के पैर उसकी मां ने पकड़ लिए। हत्या के बाद शव को कार की डिक्की में भरकर ले जाया गया और यमुना नदी में फेंक दिया गया। करीब 50 दिन बाद पुलिस को शव नहीं, बल्कि कंकाल के अवशेष बरामद हुए।
सामाजिक शादी चाहती थी अंशु, इसी पर छिड़ा विवाद
मृतका अंशु अपने प्रेमी अनुराग से भागकर नहीं, बल्कि परिवार और समाज की सहमति से विवाह करना चाहती थी। पुलिस के मुताबिक पिता रणवीर सिंह शादी के लिए तो तैयार थे, लेकिन बेटी पर दबाव बना रहे थे कि वह खुद जाकर शादी कर ले। अंशु इसके लिए राजी नहीं हुई। यही टकराव धीरे-धीरे घर में रोज़ के झगड़ों में बदल गया।
रिश्तेदारों की बातें बनीं तनाव की वजह
आरोपी रणवीर सिंह ने पुलिस को बताया कि बेटी के प्रेम संबंध रिश्ते के नाती से थे। वर्ष 2022 तक वह इस शादी के लिए तैयार थे, लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद रिश्तेदारों की बातों और सामाजिक बदनामी के डर ने उन्हें बदल दिया। छह महीने पहले छोटी बेटी का रिश्ता तय हुआ, जो प्रेम विवाह कर रही थी। इस पर अंशु ने सवाल उठाया कि जब बहन अपनी मर्जी से शादी कर सकती है तो उसे क्यों रोका जा रहा है।
वायरल वीडियो के बाद बढ़ा खतरा
विवाद बढ़ने पर पिता ने अंशु का मोबाइल छीन लिया। इसके बावजूद वह सहेली की मदद से प्रेमी अनुराग से बात करती रही। 24 अक्तूबर को अंशु ने एक वीडियो भेजकर अपनी जान को खतरा बताया। यह वीडियो रिश्तेदारों तक पहुंच गया, जिससे माता-पिता को इसकी जानकारी हो गई।
25 अक्तूबर की सुबह हुई दिल दहला देने वाली वारदात
25 अक्तूबर की सुबह करीब आठ बजे पिता-बेटी के बीच फिर विवाद हुआ। गुस्से में आकर पिता ने अंशु के गले में दुपट्टा डालकर दबाना शुरू कर दिया। अंशु जान बचाने के लिए छटपटाती रही। इस दौरान पिता उसके ऊपर बैठ गए और मां ने उसके पैर पकड़ लिए। अंशु ने छोटे भाई को आवाज दी, लेकिन उसके पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी।
शव ठिकाने लगाने की साजिश
हत्या के बाद शव को सुबह करीब 10 बजे कार की डिक्की में रखा गया और इटावा ले जाया गया। टोल प्लाजा पर कार सीसीटीवी में कैद हुई। पहले वाराणसी ले जाने की योजना थी, लेकिन बाद में यमुना नदी में शव फेंक दिया गया।
सबूत मिटाने की कोशिश
पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपी रणवीर सिंह ने वारदात के बाद घर में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज डिलीट कर दिए थे। डीवीआर में केवल सात दिन तक रिकॉर्डिंग सुरक्षित रहती है। जैसे ही आरोपी परिवार को प्रेमी अनुराग द्वारा कोर्ट में याचिका दायर किए जाने की भनक लगी, उन्होंने आनन-फानन में गुमशुदगी दर्ज कराई। इस दौरान जानबूझकर प्रेमी के बारे में कोई जानकारी पुलिस को नहीं दी गई, ताकि शक की सुई उसी पर घूमे।
फिल्मी अंदाज़ में कंकाल तक पहुंची पुलिस
डीसीपी पश्चिमी जोन अतुल शर्मा के निर्देशन में एसीपी सैंया डॉ. सुकन्या शर्मा और प्रभारी निरीक्षक विनोद मिश्र ने खुद पूरे मामले की गहराई से जांच की। 9 दिसंबर को एसडीआरएफ की मदद से यमुना नदी में सर्च ऑपरेशन चलाया गया। सबसे पहले कुर्ता और बाल बरामद हुए, जिन्हें प्रेमी अनुराग ने पहचान लिया। इसके बाद उसी स्थान से दुपट्टा, जबड़ा, खोपड़ी और एक हाथ भी मिला, जिससे पुलिस का शक और गहरा गया।
डीएनए जांच से कसेगा आरोपियों पर शिकंजा
पुलिस ने बरामद सभी अवशेषों को फॉरेंसिक लैब भेज दिया है। अब डीएनए मिलान के जरिए मृतका की पहचान की अंतिम पुष्टि की जाएगी। इसके बाद पिता, मां और अन्य सहयोगियों के खिलाफ पुख्ता वैज्ञानिक साक्ष्य अदालत में पेश किए जाएंगे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि 50 दिन बाद जिस तरह एक-एक कर शव के अवशेष मिले, उसने पूरे हत्याकांड की परतें खोल दीं।




