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सरबजीत से नूर तक : गहराया रहस्य

धार्मिक यात्रा के बाद गुमशुदगी का मामला, जांच में सामने आई चौंकाने वाली कहानी

गुरुद्वारा यात्रा का चौंकाने वाला मोड़, जांच एजेंसियों के हाथ लगा अहम सुराग

अटारी बॉर्डर से लौटा श्रद्धालुओं का जत्था पूरी तरह सामान्य लग रहा था, लेकिन एक नाम की गैरमौजूदगी ने पूरे मामले को रहस्यमयी मोड़ दे दिया। शुरू में इसे साधारण गुमशुदगी समझा गया, पर जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, इमिग्रेशन दस्तावेज़, बॉर्डर रिकॉर्ड और एजेंसियों के इनपुट ने एक ऐसी कहानी सामने रखी जिस पर किसी ने शुरू में यकीन ही नहीं किया।

जिस महिला को खोजने के लिए टीमें भेजी जा रही थीं, वह दरअसल वहां गायब नहीं हुई थी—वहां रुकी हुई थी। और जब एजेंसियों के हाथ एक निकाहनामा लगा… पूरा मामला पलट गया।

जत्थे के साथ गई महिला की पहचान खुली, सरबजीत कौर बनी नूर हुसैन

4 नवंबर को श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व के मौके पर 1932 श्रद्धालुओं का जत्था अटारी बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान गया था। इसी जत्थे में शामिल अमैनीपुर, जिला कपूरथला की 52 वर्षीय सरबजीत कौर वापसी के समय दिखाई नहीं दी।

भारत लौटने के बाद जब उसकी तलाश शुरू हुई तो एजेंसियों ने पाया कि सरबजीत ने अपना नाम बदलकर ‘नूर हुसैन’ रख लिया है और पाकिस्तानी युवक नासिर हुसैन से निकाह कर लिया है।

एजेंसियों को हाथ लगे निकाहनामे ने पुष्टि कर दी कि यह सब पहले से सोची-समझी योजना का हिस्सा था।

इमिग्रेशन फॉर्म में खाली छोड़े अहम कॉलम

जांच में सामने आया कि पाकिस्तान पहुंचने के बाद सरबजीत ने अपने इमिग्रेशन फॉर्म में राष्ट्रीयता और पासपोर्ट नंबर जैसे महत्वपूर्ण कॉलम खाली छोड़ दिए थे। इससे उसकी ट्रैकिंग लगभग असंभव हो गई।

भारतीय दूतावास, सुरक्षा एजेंसियों और इमिग्रेशन अधिकारियों ने जब मिलकर दस्तावेज़ खंगाले, तब जाकर असल कहानी खुली कि वह लापता नहीं हुई थी—बल्कि वहां रहने का फैसला उसके अपने इरादे का हिस्सा था।

तलाकशुदा, परिवार पर NDPS के कई मामले

जांच में यह भी पता चला कि सरबजीत कौर का विवाह करनैल सिंह से हुआ था, जो करीब 30 वर्षों से इंग्लैंड में रहता है। दोनों के बीच तलाक हो चुका है और उनके दो बेटे हैं।

सरबजीत व उसके बेटों पर एनडीपीएस एक्ट के कई मामले दर्ज रहे हैं। पंजाब पुलिस जब कपूरथला स्थित उसके घर पहुंची, तो परिजनों ने कोई जानकारी देने से साफ़ मना कर दिया।

2018 के बाद नियम बदले थे — फिर अकेले जाने की अनुमति कैसे मिली?

2018 में होशियारपुर की किरण बाला के पाकिस्तान जाकर धर्म बदलने के मामले के बाद यह नियम लागू किया गया था कि कोई भी महिला श्रद्धालु तभी पाकिस्तान जा सकेगी जब उसके साथ कोई परिवार सदस्य भी हो।

अब सवाल उठ रहा है कि

सरबजीत जैसी महिला को अकेले यात्रा की अनुमति किसने दी?

जत्थे की सूची केंद्र सरकार को भेजी जाती है, वहीं से वेरिफिकेशन के बाद वीज़ा जारी होता है। इससे नई दिल्ली स्थित पाकिस्तानी हाई कमीशन और SGPC की स्क्रीनिंग प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

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