
सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करते ही खरमास की शुरुआत हो गई है। इसके साथ ही शादी-विवाह में बजने वाली शहनाइयों पर ब्रेक लग गया है। खरमास को मलमास भी कहा जाता है। इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, उपनयन (यज्ञोपवीत), मुंडन जैसे सभी मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, 15 दिसंबर 2025 से खरमास शुरू होकर 16 जनवरी 2026 तक रहेगा। हालांकि, इसके बाद भी विवाह के मुहूर्त तुरंत शुरू नहीं होंगे, क्योंकि शुक्र ग्रह 16 जनवरी के बाद अस्त हो जाएंगे।
खरमास कब से कब तक
खरमास आरंभ: 15 दिसंबर 2025
खरमास समाप्ति: 16 जनवरी 2026
सूर्य के धनु राशि में प्रवेश के साथ खरमास प्रभावी
इस दौरान शादी-विवाह सहित सभी मांगलिक कार्यों पर रोक
अवधि: मलमास एक खास महीना होता है। यह लगभग 28-29 दिन का होता है। इसे इसलिए जोड़ा जाता है ताकि चंद्र और सौर साल के बीच का फर्क पूरा हो सके।
कब आता है: यह महीना हर तीन साल में एक बार आता है। मतलब लगभग 32 महीने और 16 दिन के बाद।
क्यों होता है: सौर साल में 365 दिन होते हैं और चंद्र साल में 354 दिन। इस 11 दिन के फर्क को पूरा करने के लिए मलमास आता है।
नाम: इसे कई नामों से जाना जाता है – अधिक मास, पुरुषोत्तम मास और मलिन मास।
खरमास में क्या न करें
खरमास की अवधि में निम्न कार्य वर्जित माने जाते हैं
- शादी-विवाह
- गृह प्रवेश
- उपनयन (यज्ञोपवीत)
- मुंडन संस्कार
- नामकरण व अन्नप्राशन
- वास्तु पूजा व शिलान्यास
- नया व्यापार शुरू करना या बड़ा निवेश
- भूमि, मकान की खरीद-बिक्री
कब से शुरू होंगे मांगलिक आयोजन
खरमास के बाद भी जनवरी में विवाह के कोई मुहूर्त नहीं हैं। इसकी वजह शुक्र ग्रह का अस्त होना है।
1 फरवरी 2026: शुक्र ग्रह का उदय
4 फरवरी 2026 से: विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों के मुहूर्त शुरू
2026 में कुल विवाह मुहूर्त: 33
फरवरी और जून 2026 के महीने विवाह के लिए सबसे श्रेष्ठ और उत्तम माने गए हैं।
किन महीनों में रहेंगे सीमित मुहूर्त
- मार्च, अप्रैल और मई 2026 में विवाह के मुहूर्त सीमित रहेंगे
- होली के दौरान होलाष्टक लगने से विवाह बाधित होंगे
- मई–जून में अधिक मास होने से भी कई शुभ कार्य रुक जाएंगे
जनवरी में नहीं है कोई विवाह मुहूर्त
जनवरी 2026 में विवाह के लिए कोई भी शुभ मुहूर्त नहीं है। ऐसे में 4 फरवरी 2026 से ही शादी-विवाह के आयोजन दोबारा शुरू होंगे।
इस वर्ष कुल मिलाकर शादियों के मुहूर्त कम हैं। जहां पिछले वर्षों में 40 से 45 मुहूर्त हुआ करते थे, वहीं 2026 में केवल 33 मुहूर्त उपलब्ध हैं।
धार्मिक कार्यों की अनुमति
खरमास के दौरान विवाह भले ही वर्जित हों, लेकिन इस समय एकादशी व्रत, पितृ तर्पण, सूर्य उपासना, दान-पुण्य जैसे धार्मिक कार्य किए जा सकते हैं।




