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आयुर्वेदिक शिक्षा की नई शुरुआत: यूएमसीएआर में नव बैच के लिए ‘आयुर्प्रवेशिका’ कार्यक्रम”

देहरादून में 15 दिवसीय इंडक्शन प्रोग्राम का शुभारंभ, छात्रों को मिली प्रेरणा और आयुर्वेद की परंपरा से परिचय

उत्तरांचल मेडिकल कॉलेज ऑफ आयुर्वेद एंड रिसर्च में “आयुर्प्रवेशिका” इंडक्शन प्रोग्राम का शुभारंभ, नव बैच के छात्रों को मिली प्रेरणा

देहरादून। उत्तरांचल मेडिकल कॉलेज ऑफ आयुर्वेद एंड रिसर्च (यूएमसीएआर), प्रेमनगर, देहरादून ने नवनियुक्त 2025–26 बैच के लिए 15 दिवसीय इंडक्शन प्रोग्राम “आयुर्प्रवेशिका” का शुभारंभ 10 दिसंबर 2025 को उत्तरांचल विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकानंद सभागार में किया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को आयुर्वेद की समृद्ध परंपरा, अकादमिक संस्कृति और संस्थागत मूल्यों से अवगत कराना है।

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन और धन्वंतरि वंदना से हुई, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक और सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया। इसके बाद अतिथियों का सम्मान एवं स्वागत किया गया।

निदेशक डॉ. अमित भट्ट ने स्वागत भाषण में विद्यार्थियों को अनुशासन, समर्पण और जिज्ञासा के साथ आयुर्वेदिक शिक्षा की शुरुआत करने के लिए प्रेरित किया।

मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) अरुण त्रिपाठी, कुलपति, यूएयू का प्रेरणादायी संबोधन समारोह का मुख्य आकर्षण रहा। उन्होंने छात्रों को उत्कृष्टता, नैतिक मूल्यों और आयुर्वेद के विस्तार में सार्थक योगदान देने के लिए प्रेरित किया। विशिष्ट अतिथि नरेंद्र सिंह, रजिस्ट्रार, यूएयू भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

उद्घाटन समारोह में उत्तरांचल विश्वविद्यालय के अध्यक्ष जितेन्दर जोशी और कुलपति प्रो. (डॉ.) धरम बुद्धि की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ा दिया।

कार्यक्रम संचालन डॉ. कोमल धीमान और डॉ. सतविंदर कौर ने प्रभावी और मनोहर समन्वय के साथ किया।

बीएएमएस बैच 2024 के नृत्य प्रदर्शन और डॉ. दीपक प्रसाद रतूड़ी, सहायक प्रोफेसर (संस्कृत) की वोकल प्रस्तुति ने आयोजन में सांस्कृतिक सुंदरता और आकर्षण जोड़ा।

अंत में डॉ. रवि जोशी, प्राचार्य, यूएमसीएआर ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया और सभी गणमान्य अतिथियों, छात्रों तथा संकाय सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम में यूएमसीएआर के संकाय सदस्यों — डॉ. विभूति चंद्राकर, डॉ. गोविंद मलिक, डॉ. कानू ओहरी, डॉ. ज्योति, डॉ. सुनीता, डॉ. विदुषी, डॉ. विद्यारानी जोशी, डॉ. सविता पवार, डॉ. नंदिनी, डॉ. ऋचा भट्ट, डॉ. प्रीति, डॉ. रुपाली पुरोहित, डॉ. लिप्पी, तथा चंद्रमोहन, माधव आदि ने सक्रिय और समर्पित सहभागिता निभाई।

 

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