
उत्तराखंड विधानसभा विशेष सत्र में गरजे विधायक चमोली
विधायक ने अस्मिता, पलायन और विकास नीति पर उठाए सवाल; सरकार से मांगी ठोस नीति
देहरादून।
उत्तराखंड राज्य की रजत जयंती के अवसर पर आयोजित विधानसभा के विशेष सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को धर्मपुर से भाजपा विधायक विनोद चमोली ने सदन में मूल निवास की परिभाषा और राज्य की अस्मिता पर जोरदार वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि आज उत्तराखंड में मूल निवास की शर्त इतनी शिथिल कर दी गई है कि कोई भी व्यक्ति, जो मात्र 15 वर्ष पहले यहां आकर बस गया हो, अब “मूल निवासी” कहलाने लगा है।
चमोली ने तीखे शब्दों में कहा— “बिना मूल निवास के उत्तराखंड को धर्मशाला बना दिया गया है, जिसका लाभ बाहरी लोग उठा रहे हैं और असली पर्वतीय व्यक्ति जस का तस रह गया है।” उन्होंने चेताया कि यह स्थिति न केवल राज्य की मूल भावना बल्कि उत्तराखंड आंदोलन की आत्मा को भी खोखला कर रही है।
विधायक ने सरकार से मूल निवास की नीति को पुनः परिभाषित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा किसी दल विशेष का नहीं, बल्कि उत्तराखंड की अस्मिता का प्रश्न है। सड़कों पर उठ रही आवाजों को अब अनसुना नहीं किया जा सकता। यदि इस विषय पर ठोस नीति नहीं बनी, तो राज्य अपनी पहचान और संतुलन दोनों खो देगा।
चमोली ने कहा कि राज्य के समग्र विकास के लिए अब एक मास्टर प्लान तैयार करना आवश्यक है, जिससे योजनाएं बिखरी न रहें और सभी क्षेत्रों का संतुलित विकास सुनिश्चित हो सके। उन्होंने सुझाव दिया कि हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर जैसे औद्योगिक जिलों को नोटिफाइड इंडस्ट्रियल एरिया घोषित किया जाए, क्योंकि ये पहले से ही भू-कानून की परिधि से बाहर हैं।
भाजपा विधायक ने राज्य में बढ़ते बाहरी प्रभाव को लेकर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की संस्कृति, जनसंख्या संतुलन और अस्मिता की रक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उनके वक्तव्य के दौरान सदन का माहौल गंभीर हो गया और सत्ता पक्ष के कई विधायकों ने भी उनकी बातों से सहमति जताई।
चमोली ने यह भी कहा कि राज्य को बने अब लंबा समय हो गया है, लेकिन विकास की दिशा अब भी अस्पष्ट है। “जो भी यहां आ रहा है, वह सिर्फ पैसा कमा रहा है,” उन्होंने कहा। उन्होंने माना कि जनता की यह पीड़ा हर जनप्रतिनिधि सुनता है, पर समाधान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे — यह राज्य के हित में उचित नहीं है।
सत्र के अंत में विधायक ने चेताया कि यदि अब भी राज्य सचेत नहीं हुआ, तो पलायन की समस्या भयावह रूप ले लेगी और आने वाली पीढ़ियां इसके दुष्परिणाम भुगतेंगी।




