
राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने पर छात्रों ने साझा किए विचार, गूंजा देशभक्ति का स्वर
देहरादून। उत्तराखंड राज्य स्थापना की रजत जयंती के अवसर पर उत्तरांचल यूनिवर्सिटी में “एक भारत – एक स्वर : वन्दे मातरम्” विषय पर एक ऑनलाइन वेबिनार का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने “वन्दे मातरम्” के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक महत्व पर अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. अनिल दीक्षित ने किया। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड, जो भारत का 27वां राज्य है, का गठन 9 नवंबर 2000 को हुआ था जब इसे उत्तर प्रदेश से अलग कर बनाया गया। हिमालय की गोद में बसे इस राज्य को “देवभूमि” कहा जाता है। डॉ. दीक्षित ने कहा कि 25 वर्षों में उत्तराखंड ने औद्योगिक, शैक्षिक और पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है।
छात्र पार्थ सिंघल ने “वन्दे मातरम्” के ऐतिहासिक महत्व पर बोलते हुए कहा कि यह गीत भारत के स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा रहा है, जिसने करोड़ों भारतीयों को एक सूत्र में बांधा।
छात्रा आयुषी शंकर ने बताया कि कवि बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित “वन्दे मातरम्” का प्रथम प्रकाशन 7 नवंबर 1875 को साहित्यिक पत्रिका बंगदर्शन में हुआ था, जो बाद में उपन्यास आनंदमठ में शामिल होकर स्वाधीनता आंदोलन का प्रतीक बन गया।
छात्र मोहम्मद अदीब ने कहा कि “वन्दे मातरम्” ने भारतवासियों के भीतर राष्ट्रभक्ति की ऐसी ज्वाला जगाई जिसने अंग्रेज़ी हुकूमत की नींद उड़ा दी।
छात्रा ऐशप्रीत बजाज ने कहा कि भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने इसे राष्ट्रीय गीत का दर्जा देने का प्रस्ताव रखा, जिसके लिए समस्त राष्ट्र उनका ऋणी है।
वेबिनार में आदर्श कुमार तिवारी, राहुल रावत, आयुषी शंकर, आशुतोष नौटियाल, पार्थ सिंघल, मोहम्मद अदीब, अंश, हर्ष, रश्मी, ऐशप्रीत बजाज, भूमिका रौथान, ऋषिका, अपूर्वा, रजत और आयुष सहित अनेक छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में छात्रों ने एक स्वर में “वन्दे मातरम्” गाकर राष्ट्रप्रेम और एकता का संदेश दिया।



