
देहरादून, 9 सितम्बर: अमेरिकी नागरिकों को माइक्रोसॉफ्ट का अधिकारी बनकर ठगने वाले फर्जी कॉल सेंटर के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने ए टू ज़ेड सॉल्यूशंस के मालिक अरिफ अली समेत नितिन गुप्ता, गर्वित सिंघल और उदित गर्ग के विरुद्ध प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत विशेष न्यायालय में अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) दाखिल की है। कोर्ट ने आरोपितों को नोटिस जारी कर दिए हैं।
जुलाई 2022 में हुआ था खुलासा
यह मामला जुलाई 2022 में सामने आया था जब उत्तराखंड एसटीएफ ने न्यू रोड स्थित कॉल सेंटर पर छापा मारकर 14 आरोपितों को गिरफ्तार किया। मौके से भारी मात्रा में नकदी, लैपटॉप और संवेदनशील डाटा बरामद हुआ था। एसटीएफ की एफआईआर के आधार पर ईडी ने जांच शुरू की।
ठगी का तरीका
- गिरोह के सदस्य खुद को माइक्रोसॉफ्ट का अधिकारी बताकर विदेशी नागरिकों से संपर्क करते थे।
- हैकिंग एप के जरिए उनके कंप्यूटर पर एक्सेस हासिल कर लिया जाता।
- तकनीकी खामी दूर करने या एंटीवायरस अपडेट करने के नाम पर 500 से 1000 डॉलर तक वसूले जाते।
- कई बार पीड़ितों के सिस्टम पर आपत्तिजनक सर्च हिस्ट्री डालकर ब्लैकमेल भी किया जाता था।
संगठित नेटवर्क और करोड़ों की कमाई
यह नेटवर्क दिल्ली से जुड़ा था, जहां से विदेशी नागरिकों का डाटा और फर्जी टोल-फ्री नंबर उपलब्ध कराए जाते थे। कॉल सेंटर में करीब 300 कर्मचारी काम कर रहे थे जिन्हें 20–25 हजार रुपये मासिक वेतन मिलता था। ईडी ने अब तक पुलिस की छापेमारी में बरामद 1.26 करोड़ रुपये नकद कुर्क कर लिया है।
ईडी का कहना है कि ठगी नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने के लिए जांच तेज कर दी गई है। विदेश से भारत तक पैसों के आने के चैनल और इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की गहन पड़ताल की जा रही है।
यह कार्रवाई राज्य में साइबर अपराध और आर्थिक ठगी के खिलाफ प्रशासनिक स्तर पर सख्ती का बड़ा संकेत मानी जा रही है।


