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माया गुरूकुल इंटरनेशनल स्कूल में वीर बाल दिवस समारोह, सांस्कृतिक कार्यक्रमों से दी शहादत को श्रद्धांजलि

देहरादून

माया गुरूकुल इंटरनेशनल स्कूल में वीर बाल दिवस के अवसर पर भव्य समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और नाटक के माध्यम से साहिबजादों के बलिदान से जुड़ी घटनाओं को अत्यंत सुव्यवस्थित और भावपूर्ण ढंग से मंचित किया। नाट्य प्रस्तुति ने दर्शकों को इतिहास के उस गौरवशाली अध्याय से जोड़ दिया, जिसमें धर्म और सत्य के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया गया।

 

समारोह को संबोधित करते हुए स्कूल की निदेशक डॉ. तृप्ति जुयाल सेमवाल ने कहा कि वीर बाल दिवस, जिसे शहजादे दिवस भी कहा जाता है, सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के दो छोटे साहिबजादों—बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह—की शहादत की स्मृति में मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1705 में इन दोनों बाल वीरों को दीवार में जिंदा चुनवा दिया गया था, जो धर्म, सत्य और साहस के प्रति उनके अविश्वसनीय बलिदान का प्रतीक है।

डॉ. सेमवाल ने विद्यार्थियों से अपने जीवन में सत्यवादिता, साहस और ईमानदारी को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि इन्हीं मूल्यों के सहारे समाज और राष्ट्र को सही दिशा दी जा सकती है।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित माया देवी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) आशीष सेमवाल ने छात्रों को रंगारंग कार्यक्रमों में सहभागिता के लिए बधाई दी। उन्होंने विद्यालय के शिक्षकों, शिक्षिकाओं एवं अन्य कार्मिकों की सराहना करते हुए कहा कि वीर बाल दिवस बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह के अद्वितीय साहस, निष्ठा और राष्ट्रधर्म के प्रति समर्पण को नमन करने का दिन है। यह दिवस आने वाली पीढ़ियों को त्याग, धैर्य और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

समारोह के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने नन्हे शहीदों के अमर बलिदान को श्रद्धापूर्वक नमन किया।

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