फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़: मास्टरमाइंड गिरफ्तार, 16 लड़कियां भी पकड़ी गईं
मुज़फ़्फरनगर का है मामला , नौकरी का झांसा देकर लाखों ठगे

“हेलो… आप कौन बोल रहे हैं? नौकरी चाहिए क्या?” — ऐसे कॉल्स ने न जाने कितने युवाओं को सपनों के जाल में फंसा लिया। नौकरी दिलाने का झांसा देकर ठगी करने वाला यह गिरोह आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया।
बंद कमरे में बैठी 16 लड़कियां
पुलिस की छापेमारी में खुलासा हुआ कि कॉल सेंटर में 16 युवतियां हर दिन घंटों फोन पर युवाओं को नौकरी का लालच देती थीं। इन्हें हर महीने एक फिक्स टारगेट पूरा करने का दबाव था। टारगेट पूरा होने पर इन्हें 5 से 7 हज़ार रुपये वेतन और अलग से कमीशन दिया जाता था।
कैसे फंसाए जाते थे शिकार
- फोन कॉल्स में लड़कियां खुद को बड़ी कंपनियों की एचआर मैनेजर बताती थीं।
- उम्मीदवारों से नकली इंटरव्यू कराया जाता था।
- कहा जाता कि चयन हो गया है, लेकिन जॉइनिंग से पहले प्रोसेसिंग फीस या सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा करना होगा।
- इसी बहाने लाखों रुपये बेरोजगार युवाओं से वसूले जाते थे।
छापेमारी के दौरान पुलिस को 20 मोबाइल फोन, 3 लैपटॉप, 30 से अधिक सिम कार्ड, ठगी से जुड़े रजिस्टर और दस्तावेज़ व नकदी मिली। इनसे साफ हुआ कि गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और अब तक करोड़ों रुपये की ठगी कर चुका है।
मास्टरमाइंड आहद और जुबैद
पुलिस ने दो मुख्य आरोपियों — आहद और जुबैद — को गिरफ्तार किया है। यही लोग इस कॉल सेंटर के असली मास्टरमाइंड थे। दोनों ही युवतियों को काम पर रखते, उन्हें तनख्वाह और कमीशन देते और पूरे नेटवर्क को बाहर से कंट्रोल करते थे। एसपी अभिषेक यादव ने बताया कि गिरफ्तार लड़कियों से पूछताछ जारी है। अब गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और उनके बैंक खातों की जांच होगी। जल्द ही मुख्य सरगना के आर्थिक स्रोतों पर भी शिकंजा कसा जाएगा और संपत्ति कुर्की की कार्रवाई की तैयारी है।
कुल मिलाकर मुज़फ़्फरनगर का यह मामला केवल एक कॉल सेंटर का खुलासा नहीं, बल्कि ठगी के उस बड़े जाल की तस्वीर है जो बेरोजगारी की आड़ में युवाओं को फंसा रहा है। पुलिस की कार्रवाई ने एक कदम जरूर उठाया है, लेकिन असली चुनौती है इस नेटवर्क की जड़ तक पहुँचना।




