
ऋषिकेश, 26 अगस्त। मां को स्नेह और सुरक्षा का पर्याय माना जाता है। मां की ममता से बढ़कर इस दुनिया में कोई रिश्ता नहीं होता। लेकिन ऋषिकेश से सामने आई घटना ने इस रिश्ते को शर्मसार कर दिया। आरोप है कि एक महिला अपने गुंडों के साथ पहुंचकर अपने ही नाबालिग बेटे पर हमला कर बैठी। इस करतूत से मासूम बच्चा गहरे सदमे में है।
तीर्थनगरी ऋषिकेश में पारिवारिक विवाद ने खौफनाक मोड़ ले लिया है। आरोप है कि एक महिला अपने सहयोगियों के साथ पहुंचकर नाबालिग बेटे को ही पीटने लगी। इस घटना के बाद बच्चा मानसिक आघात में है और लगातार सदमे में है। एयरफोर्स अधिकारी पिता को बेटे को काउंसलिंग के लिए उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग तक ले जाना पड़ा।
उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने मामले को बेहद गंभीर बताते हुए ऋषिकेश पुलिस को मुकदमा दर्ज कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ पारिवारिक विवाद नहीं, बल्कि बच्चे के अधिकारों और मानसिक स्वास्थ्य पर सीधा हमला है।
पांच साल से चल रहा विवाद
मिली जानकारी के अनुसार, एयरफोर्स अधिकारी और उनकी पत्नी का वैवाहिक जीवन 15 साल तक सामान्य रहा। दोनों के दो बेटे हैं। करीब पांच साल पहले पत्नी प्रॉपर्टी डीलर के संपर्क में आई और बड़े बेटे को लेकर मायके चली गई। छोटा बेटा पिता के साथ रह रहा था। आरोप है कि हाल ही में महिला अपने साथियों के साथ ऋषिकेश स्थित एक दुकान पर कब्जा करने की नीयत से पहुंची। वहां मौजूद छोटे बेटे पर हमला किया गया और दुकान का डीवीआर भी उठा ले जाया गया। घटना ने मासूम को गहरे सदमे में डाल दिया।
मां की गैरहाजिरी
पिता की शिकायत पर आयोग ने सुनवाई शुरू की है। अब तक दो बार हुई सुनवाई में मां या उसके पक्ष से कोई उपस्थित नहीं हुआ। आयोग की ओर से महिला को कई बार बुलावा भेजा गया, लेकिन कोई सहयोग नहीं मिला।




