कांग्रेस : पंचायत चुनाव का जोश कहीं उड़ा न दे भाजपा के होश
विपक्ष कर रहा सरकार की चौतरफा घेराबंदी

विधानसभा सत्र में कांग्रेस का प्रहार, हरक सिंह रावत के आरोपों से मचा सियासी घमासान
गीता मिश्रा
देहरादून। पिछले कुछ समय से प्रदेश में भाजपा से पिछड़ रही कांग्रेस को पंचायत चुनाव से बूस्ट मिला है और अब कांग्रेसी नेता सड़क से सदन के साथ ही कोर्ट तक कही भी कोई कसर छोड़ना नहीं चाहते हैं। एक तरफ जहां कांग्रेस ने गैरसैंण में आयोजित विधानसभा सत्र के दौरान जमकर हो हंगामा किया वहीं अब कांग्रेस के विरिष्ठ नेता हरक सिंह रावत भी खुलकर भाजपा पर हमलावर हो गए हैं। अब देखना यह होगा कि कांग्रेसियों का यह जोश विधानसभा चुनाव तक टिककर मामले को अंजाम तक पहुंचाता है या फिर कुछ दिनों की गहमागहमी के साथ ही ठंडा पड़ जाता है।
गैरसैंण में चल रहे विधानसभा सत्र में इस बार विपक्ष के तेवर खासे आक्रामक दिखे। कांग्रेस की पूरी टीम ने एकजुट होकर सरकार पर भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन के गंभीर आरोप लगाए। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कार्य मंत्रणा समिति से इस्तीफा देकर सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया। इन इस्तीफों ने सत्र की कार्यवाही को जहां और अधिक तीखा बनाया, वहीं कांग्रेस के अंदर नई राजनीतिक ऊर्जा का संकेत भी दिया।
सत्र के दौरान सबसे बड़ा राजनीतिक धमाका तब हुआ, जब पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने लंबे समय बाद मीडिया के सामने आकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने राज्य की खनन नीति को लेकर सवाल उठाए और इसे सरकारी उगाही का जरिया बताया। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि जब वे सत्ता में थे, तब उन्होंने स्वयं भी खनन माफिया से धन लिया। हरक ने यह चौंकाने वाला दावा किया कि उस राशि में से उन्होंने भाजपा संगठन को एक करोड़ रुपये दिए थे।
उनके इस बयान ने प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। सत्तारूढ़ दल पर सीधे तौर पर उंगली उठने से विपक्ष को हमला करने का नया मौका मिल गया है। वहीं, भाजपा खेमे में बचाव की रणनीति बनाने की चर्चा तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हरक सिंह रावत का यह आरोप आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति को और गर्मा सकता है।
कांग्रेस खेमे में जहां यशपाल आर्य और प्रीतम सिंह का इस्तीफा कार्यकर्ताओं के बीच ऊर्जा और जोश भरने का काम कर रहा है, वहीं हरक सिंह रावत का सामने आना पार्टी की रणनीति को और धार देने वाला कदम माना जा रहा है। पंचायत चुनावों में कांग्रेस को मिली सफलता ने पहले ही कार्यकर्ताओं के मनोबल को बढ़ाया है। अब पार्टी के दिग्गज नेता किसी भी कीमत पर इस माहौल को कमजोर नहीं होने देना चाहते।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस एकजुट होकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है। पार्टी के भीतर यह समझ है कि यदि अभी से सरकार की नीतियों और भ्रष्टाचार के मामलों को मुद्दा बनाया जाए तो आगामी विधानसभा चुनाव में इसका लाभ उठाया जा सकता है। इसी रणनीति के तहत कांग्रेस ने सत्र के मंच को सरकार पर हमलावर होने के लिए पूरी तरह इस्तेमाल किया।
हरक सिंह रावत का मीडिया के सामने आना भी इस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। वे लंबे समय से सार्वजनिक मंचों से दूर थे, लेकिन मौजूदा राजनीतिक माहौल को देखते हुए उन्होंने भी सामने आकर अपनी बात रखी। उनके आरोप न केवल भाजपा पर सवाल खड़े करते हैं, बल्कि यह भी संकेत देते हैं कि वे आगामी सियासी समीकरणों में सक्रिय भूमिका निभाना चाहते हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कांग्रेस की यह आक्रामकता और ऊर्जा आगामी विधानसभा चुनाव तक बनी रह पाएगी? या फिर यह केवल एक फौरी लहर बनकर रह जाएगी, जैसा कि पहले भी कई बार देखने को मिला है। फिलहाल, गैरसैंण सत्र ने साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में उत्तराखंड की राजनीति और अधिक गर्म होगी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज़ी से जारी रहेगा।




