
देहरादून । आपदा प्रबंधन की दिशा में केंद्र सरकार ने एक अहम और दूरगामी फैसला लेते हुए हीटवेव (लू) और आकाशीय बिजली को राष्ट्रीय स्तर पर अधिसूचित आपदाओं की सूची में शामिल कर लिया है। यह निर्णय सोलहवें वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर लागू किया गया है, जिससे उत्तराखंड जैसे आपदा-संवेदनशील राज्यों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
राज्य में बीते वर्षों के दौरान न केवल मैदानी इलाकों बल्कि पर्वतीय जिलों में भी भीषण गर्मी और आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं में लगातार वृद्धि देखी गई है। इन प्राकृतिक घटनाओं के कारण हर साल जनहानि के साथ-साथ कृषि, पशुधन और बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान उठाना पड़ता है।
अब तक इन आपदाओं को अधिसूचित श्रेणी में शामिल न किए जाने के चलते राज्यों को सीमित संसाधनों से ही राहत और मुआवजा देना पड़ता था। नई अधिसूचना के बाद केंद्र सरकार से सीधे आर्थिक और तकनीकी सहायता उपलब्ध हो सकेगी, जिससे प्रभावित परिवारों तक समय पर राहत पहुंचाने में तेजी आएगी।
आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के चलते आने वाले वर्षों में हीटवेव और आकाशीय बिजली की घटनाएं और गंभीर रूप ले सकती हैं। ऐसे में इन्हें आधिकारिक आपदा की श्रेणी में शामिल करना न केवल राहत कार्यों को मजबूत करेगा, बल्कि भविष्य की तैयारियों और बजट योजनाओं को भी अधिक प्रभावी बनाने में मददगार साबित होगा।




