
शैक्षिक, सामाजिक और आध्यात्मिक जगत को गहरा आघात
ज्योतिर्मठ। शिक्षा जगत के सम्मानित हस्ताक्षर और सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज ज्योतिर्मठ के रसायन विज्ञान प्रवक्ता कैलाश भट्ट के असामयिक निधन से क्षेत्र में शोक की लहर है। बुधवार, 10 दिसंबर को गुप्तकाशी से ज्योतिर्मठ लौटते समय उन्हें हृदयघात हुआ। परिजन उन्हें तत्काल बेस अस्पताल श्रीकोट ले गए, पर चिकित्सक उन्हें बचा नहीं सके और अपराह्न 4 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
जनपद रुद्रप्रयाग की कालीमठ घाटी के खोन गाँव निवासी श्री भट्ट वर्ष 2009 से ज्योतिर्मठ में रह रहे थे। पिछले डेढ़ दशक से यह क्षेत्र ही उनकी कर्मस्थली बन गया था। उन्होंने आचार्य तुलसीराम देवशाली के मार्गदर्शन में श्री शंकरा आदर्श विद्या मंदिर इंटर कॉलेज और केन्द्रीय विद्यालय सुनील, जोशीमठ में सेवाएं दीं। वर्तमान में वे सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, ज्योतिर्मठ में रसायन विज्ञान प्रवक्ता के रूप में कार्यरत थे। मेहनती, सरल और आध्यात्मिक प्रवृत्ति के धनी श्री भट्ट स्थानीय धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में सदैव सक्रिय रहते थे।
श्रीअरविन्द अध्ययन केंद्र से वे एक दशक से जुड़े थे और वर्तमान में युवा संयोजक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यों में भी पूर्ण निष्ठा से सक्रिय थे। उनकी पत्नी श्रीमती ममता भट्ट सरस्वती शिशु मंदिर बड़ागांव में शिक्षिका हैं।
उनके निधन पर ज्योतिर्मठ के विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य व्यक्तियों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। गुरुवार को कोटमा स्थित पैतृक घाट पर गमगीन वातावरण में उनका अंतिम संस्कार किया गया।
स्वामी माधवाश्रम केंद्रीय विद्या निकेतन हाई स्कूल सिंग्धार में विद्यार्थियों व शिक्षकों ने दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय जोशीमठ की प्राचार्य प्रो. प्रीति कुमारी, उपजिलाधिकारी चंद्रशेखर वशिष्ठ, सामाजिक कार्यकर्ता अतुल सती, डॉ. चरणसिंह केदारखंडी, डॉ. जी. के. सेमवाल, श्री बद्रीनाथ वेद वेदांग संस्कृत विद्यालय के प्रधानाचार्य, श्रीअरविन्द सोसायटी ज्योतिर्मठ के अध्यक्ष अरविंद प्रकाश पंत, संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य देवेश्वर थपलियाल, जिला रेडक्रॉस सोसायटी के अध्यक्ष व श्रीअरविन्द सोसायटी के सचिव ओमप्रकाश डोभाल, प्रकाश पँवार, प्रधानाचार्य शंभू प्रसाद चमोला, महावीर सिंह फर्स्वाण ‘श्रद्धालु’, डॉ. राजकिशोर सुनिल, आचार्य देवी प्रसाद भट्ट, डॉ. मोनिका सती, राजेन्द्र कांति, राजेन्द्र चमोला, डॉ. मंजीत सिंह बिष्ट, पूर्व अधिशासी अधिकारी भगवती प्रसाद कपरुवांण, नेहा भुजवांण, गोवर्धन बरमोला, जगदीश चौहान, नीलम नवानी, सुलेखा चौहान सहित अनेक लोगों ने उनके निधन को ज्योतिर्मठ की शैक्षिक विरासत के लिए अपूरणीय क्षति बताया और श्रद्धांजलि अर्पित की।




