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पतंजलि का शुद्ध ‘गाय का घी’ फेल, अदालत ने ठोका भारी जुर्माना

पहले टेस्ट में फेल, अपील पर दूसरी जांच भी असफल अदालत ने कहा : उपभोक्ता सुरक्षा से समझौता नहीं

बाबा रामदेव की बढ़ी मुश्किलें, इस से पहले च्यवनप्राश के विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में लगाई कड़ी फटकार 

पतंजलि के गाय के घी की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। जांच में घी मानकों पर खरा नहीं उतर पाया, जिसके बाद अदालत ने वितरक और विक्रेता पर कुल ₹1.40 लाख का जुर्माना ठोका है। इससे पहले च्यवनप्राश को लेकर भी पतंजलि और डाबर के बीच विवाद सामने आया था, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने बाबा रामदेव और पतंजलि को भ्रामक दावों के लिए सख्त फटकार लगाई थी।

देहरादून। पतंजलि के गाय के घी को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कोर्ट तक पहुंच गया है। कासनी क्षेत्र से लिए गए घी के नमूने की दो अलग-अलग लैब रिपोर्टों—पहली रुद्रपुर और दूसरी गाजियाबाद की राष्ट्रीय लैब—में लगातार गुणवत्ता मानकों पर फेल होने के बाद अदालत ने कड़ी कार्रवाई करते हुए कुल ₹1,40,000 का जुर्माना लगाया है।

इसमें ब्रह्म एजेंसी (डिस्ट्रिब्यूटर) पर ₹25,000 और करन जनरल स्टोर (विक्रेता) पर ₹15,000 का दंड शामिल है। अदालत ने कहा कि उपभोक्ताओं के साथ गुणवत्ता को लेकर कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।

कब-कब क्या हुआ? पूरा विवाद और कानूनी टाइमलाइन

20 अक्टूबर 2020: खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने कासनी से पतंजलि गाय के घी का नमूना लिया। नमूना गुणवत्ता जांच के लिए संबंधित लैब में भेजा गया।

2021 (रुद्रपुर लैब रिपोर्ट): पहली जांच रिपोर्ट में घी मानकों पर फेल पाया गया। रिपोर्ट में घी की संरचना और शुद्धता को लेकर गंभीर विसंगतियाँ दर्ज की गईं।

15 अक्टूबर 2021: पतंजलि की ओर से दुबारा जांच की अपील की गई और कंपनी ने दूसरी लैब में टेस्ट कराने का अनुरोध किया।

16 अक्टूबर 2021: अपील के बाद नमूने को गाजियाबाद की राष्ट्रीय खाद्य प्रयोगशाला भेजा गया, जो देश की प्रमाणिक केंद्रीय लैब में से एक है।

26 नवंबर 2021: दूसरी रिपोर्ट भी सामने आई, जिसमें घी को फिर एक बार असफल घोषित किया गया। लगातार दो वैज्ञानिक परीक्षणों में गिरती गुणवत्ता ने मामले को गंभीर बना दिया।

17 फरवरी 2022: खाद्य सुरक्षा विभाग ने पूरा मामला कोर्ट में प्रस्तुत किया। कंपनी, वितरक और विक्रेता के पक्षों को नोटिस भेजे गए।

27 नवंबर 2025: तीन साल तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने फैसला सुनाया। दोनों लैब रिपोर्टों को विश्वसनीय मानते हुए वितरक और विक्रेता पर कुल ₹1.40 लाख का जुर्माना लगाया।

अदालत ने कहा कि उपभोक्ताओं को गलत गुणवत्ता वाला उत्पाद देना खाद्य सुरक्षा मानकों का सीधा उल्लंघन है।

पतंजलि के गाय के घी को लेकर इस मामले ने एक बार फिर सवाल उठाए हैं, खासकर तब जब कंपनी हाल ही में च्यवनप्राश विवाद और सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणियों के चलते पहले ही चर्चा में रही है। लगातार दो लैब रिपोर्टों में फेल होने और लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आए इस फैसले ने उपभोक्ता सुरक्षा और खाद्य मानकों पर नए सिरे से बहस छेड़ दी है।

 

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