
76.98 लाख छात्र सदस्यता के साथ अभाविप ने बनाया नया रिकॉर्ड
देहरादून। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के 71वें राष्ट्रीय अधिवेशन का शुक्रवार को देहरादून में भव्य शुभारंभ हुआ। परेड ग्राउंड में अस्थायी रूप से निर्मित भगवान बिरसा मुंडा नगर के जनरल बिपिन रावत सभागार में आयोजित उद्घाटन समारोह में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एस. सोमनाथ मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने दीप प्रज्वलन कर सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत की।
मंच पर अभाविप के नवनिर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) रघुराज किशोर तिवारी, पुनर्निर्वाचित राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी, राष्ट्रीय मंत्री कु. क्षमा शर्मा, स्वागत समिति अध्यक्ष और ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. कमल घनशाला, स्वागत समिति महामंत्री रमेश गड़िया, उत्तराखण्ड अभाविप प्रांत अध्यक्ष डॉ. जे.पी. भट्ट और प्रांत मंत्री ऋषभ रावत मौजूद रहे।
उद्घाटन सत्र के दौरान महामंत्री डॉ. सोलंकी ने वर्षभर की कार्ययात्रा का विवरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि अभाविप ने इस वर्ष 76,98,448 विद्यार्थियों को सदस्य बनाया—यह संगठन के 77 वर्षीय इतिहास में सबसे बड़ा आंकड़ा है।
उद्घाटन सत्र के बाद “युवा भारत का आह्वान” विषय पर विशेष व्याख्यान हुआ, जिसमें अभाविप के राष्ट्रीय संगठन मंत्री आशीष चौहान ने संबोधन दिया। इसी विषय पर समानांतर सत्रों में भी गहन चर्चा हुई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. एस. सोमनाथ ने युवाओं को राष्ट्र की वास्तविक शक्ति बताते हुए कहा, “किसी भी देश का उत्थान उसकी युवा पीढ़ी के ज्ञान, तकनीक और निडर शक्ति पर निर्भर करता है। आज भारत विश्व में तकनीकी नेतृत्व की नई भूमिका निभा रहा है। चंद्रयान-3 से लेकर अंतरिक्ष के अनेक मिशनों तक—भारत ने सिद्ध किया है कि उसके वैज्ञानिक और युवा नई दिशा देने में सक्षम हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि भारत की 25% से अधिक जनसंख्या युवा है, जो देश की सबसे बड़ी सांस्कृतिक पूंजी है।
“ABVP ने साबित किया है कि नेतृत्व का वास्तविक अर्थ ‘सेवा’ है। जब हर युवा में साहस, कौशल और राष्ट्रभाव होगा, तभी विकसित भारत का निर्माण संभव है।”
राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. तिवारी ने कहा कि अभाविप विश्व का सबसे बड़ा छात्र संगठन है और यह सम्मान उसकी कार्यपद्धति तथा समाज में बढ़ती स्वीकृति के कारण मिला है। उन्होंने कहा कि संगठन के आदर्श, लोकनायक प्रा. यशवंतराव केलकर की शिक्षाओं ने संगठन को नई दिशा दी।
पुनर्निर्वाचित महामंत्री वीरेंद्र सोलंकी ने अपने संबोधन में कहा कि अभाविप अब बहुआयामी वटवृक्ष बन चुका है। उन्होंने बताया कि अभाविप अपनी स्थापना से लेकर आज तक राष्ट्र-एकता, शिक्षा, युवा सशक्तिकरण और सामाजिक परिवर्तन के अनेक अभियानों से देश का मार्गदर्शन करता रहा है।
उन्होंने उपस्थित प्रतिनिधियों से आह्वान किया कि तीन दिवसीय अधिवेशन से मिले अनुभवों को अपने कार्यक्षेत्र में ले जाकर “राष्ट्र प्रथम” के संकल्प को और मजबूत करें।



