अमर होंगे अमीर ? कीमत बस ₹ 2 करोड़
650+ लोग अपनी ‘फ्यूचर रीबर्थ’ के इंतजार में

अमीरों को अमर बनाने की टेक्नोलॉजी
ज़रा सोचिए… अगर कोई आपसे कहे कि आपकी मौत केवल एक ठहराव है, अंत नहीं!
जिस दिन आपकी सांस थमेगी, उसी दिन आपकी ज़िंदगी को फिर से शुरू करने की तैयारी कहीं हो रही होगी। सुनकर अजीब लगता है, है न?
लेकिन विज्ञान अब उस सीमा को पार कर चुका है, जहाँ मौत को भी “रिवर्स बटन” देने की बातें हो रही हैं।एक कंपनी का दावा है कि वह इंसान को मृत्यु के बाद फिर से ज़िंदा कर सकती है — कोई चमत्कार नहीं, बल्कि ठोस वैज्ञानिक तकनीक से।
अब सवाल यह नहीं है कि “मौत कब आएगी?”, बल्कि यह है कि क्या आप मरने के बाद भी फिर जीना चाहेंगे?
एक साहसिक दावा – “हम मौत को हरा सकते हैं”
जर्मनी की स्टार्टअप कंपनी टुमारो बायो (Tomorrow Bio) का दावा है कि उन्होंने ऐसा तरीका खोजा है जिससे किसी भी इंसान को मरने के बाद दोबारा जीवित किया जा सकता है।
कंपनी “क्रायो प्रिज़र्वेशन सर्विसेज़” प्रदान करती है — यानी मृत शरीर को इस तरह संरक्षित किया जाता है कि भविष्य में उसे फिर से जीवन में लौटाया जा सके।
क्रायो प्रिज़र्वेशन: सड़न रोकने के लिए शरीर को फ्रीज करना
कंपनी के अनुसार, मृत शरीर को लिक्विड नाइट्रोजन में -198 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा किया जाता है।
इस तापमान पर शरीर का डी-कंपोज़िशन (सड़ना या गलना) पूरी तरह रुक जाता है — यानी शरीर वैसा ही सुरक्षित रहता है। इस अवस्था को “बायो-स्टेसिस (Bio-Stasis)” कहा जाता है।
प्रक्रिया और कीमत
पूरे शरीर को फ्रीज करने की लागत लगभग ₹1.8 करोड़ है।
सिर्फ दिमाग (Brain Preservation) को संरक्षित करने के लिए ₹67.2 लाख।
मौत के बाद, यूरोपियन देशों में एम्बुलेंस बॉडी को स्विट्ज़रलैंड के मेन सेंटर तक ले जाती है। वहां इसे स्टील कंटेनर में 10 दिनों तक लिक्विड नाइट्रोजन में रखा जाता है ताकि सड़न पूरी तरह रुके।
अब तक 6 इंसान और 5 जानवर फ्रीज हो चुके हैं
कंपनी ने बताया कि अब तक 6 इंसानों और 5 पालतू जानवरों का सफल क्रायो प्रिज़र्वेशन किया जा चुका है।
साथ ही, 650 से अधिक लोग एडवांस पेमेंट कर चुके हैं और अपनी बॉडी को भविष्य में फ्रीज कराने के लिए इंतजार कर रहे हैं।
कंपनी का विज़न: “आप खुद तय करें, कितने समय तक जीना है”
टुमारो बायो का कहना है कि उनका सपना एक ऐसी दुनिया बनाना है, जहां इंसान अपनी जीवन अवधि खुद तय कर सके। अगर यह तकनीक सफल हुई, तो यह इतिहास का पहला ऐसा क्षण होगा जब इंसान मौत पर विजय हासिल करेगा।




