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देहरादून में अतिवृष्टि का कहर: मरने वालों की संख्या हुई 13, 16 लापता, कई घायल

डीएम ने संबंधित विभागों को दिए राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाने के निर्देश

देहरादून:  सोमवार की रात हुई अतिवृष्टि ने जनपद में भारी तबाही मचाई। विभिन्न क्षेत्रों में अब तक 13 लोगों की मौत, तीन घायल और 16 लोग लापता होने की पुष्टि हुई है। आपदा से सरकारी एवं निजी परिसंपत्तियों को भी व्यापक क्षति पहुंची है। 13 पुल, 10 पुलिया, दो मकान, 31 दीवारें, 21 सड़कें और सात पेयजल योजनाएं क्षतिग्रस्त हो गई हैं।

मंगलवार को जिलाधिकारी सविन बंसल ने मालदेवता, सहस्रधारा, मजयाडा और कार्लीगाड सहित प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिया। निरीक्षण के दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह और मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह भी मौजूद रहे।

डीएम ने संबंधित विभागों को राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। लोनिवि और पीएमजीएसवाई को पर्याप्त मशीनरी और मैनपावर लगाकर सड़कों एवं संपर्क मार्गों को जल्द बहाल करने के आदेश दिए गए। प्रभावित क्षेत्रों में राहत शिविरों में ठहराए गए लोगों को भोजन पैकेट व अन्य आवश्यक सामग्री वितरित की जा रही है। साथ ही बिजली, पानी और अन्य मूलभूत सुविधाओं को तुरंत बहाल करने की कवायद जारी है।

आपदा के दौरान सहस्रधारा, मजयाडा और कार्लीगाड क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। मजयाडा में तीन लोग मलबे में दबे और एक लापता होने की सूचना है। यहां कई आवासीय भवनों, दुकानों, होटलों और रेस्तरां को नुकसान पहुंचा है। सहस्रधारा–कार्लीगाड मोटर मार्ग भी नौ से अधिक स्थानों पर ध्वस्त हो गया। प्रशासन ने चामासारी स्थित राजकीय इंटर कॉलेज में राहत शिविर स्थापित कर प्रभावितों को सुरक्षित ठहराया है।

एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों ने राहत व बचाव कार्य में तेजी दिखाते हुए कार्लीगाड क्षेत्र में फंसे 70 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया। जिलाधिकारी ने कहा कि प्रभावित परिवारों की मदद में कोई कमी नहीं रखी जाएगी। जो लोग किराए पर शिफ्ट होना चाहें, उन्हें प्रति परिवार तीन माह तक 4-4 हजार रुपये किराया सहायता दी जाएगी।

जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे सुरक्षित स्थानों पर रहें और आपदा की इस घड़ी में प्रशासन को सहयोग करें।

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