शैलेश मटियानी: जिनके नाम पर मिलता है शिक्षकों को सम्मान
जानें कौन थे हिंदी साहित्य के जनकथाकार

कल शिक्षक दिवस पर राजभवन में सम्मानित होंगे 16 शिक्षक
देहरादून। हर साल शिक्षक दिवस (5 सितंबर) पर उत्तराखंड सरकार शिक्षकों को “शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार” से सम्मानित करती है—लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि शैलेश मटियानी कौन थे, जिनके नाम पर यह सम्मान दिया जाता है? चलिए जानते हैं उनके जीवन, लेखनी और उन शिक्षकों के बारे में भी, जिन्हें कल 5 सितंबर 2025 को में यह पुरस्कार मिलने जा रहा है।
कहां पैदा हुए और कैसी थी शिक्षा
शैलेश मटियानी का जन्म अल्मोड़ा जनपद के बरेछीना में 14 अक्टूबर 1931 को हुआ था। उनकी द्वारा लिखी कहानियों में कुमाऊं प्रवेश को अच्छी तरह समझा जा सकता है। अपने जीवन में मटियानी जी को एक अच्छे साहित्यकार कहानीकार एवं उपन्यासकार के रूप में कई बार सम्मानित किया गया। वह अपने उपन्यास में शब्दों के ताने बाने इतने स्पष्ट से बुनते थे कि पाठकों को उनकी लेखनी और भाव अच्छी तरह से समझ आ जाती थी। इनका पहला उपन्यास बोरीवली से बोरीबंदर था। जिसमें उन्होंने अपने जीवन काल में मुंबई में प्रवास के जीवन संघर्ष का चित्रण का उल्लेख किया है तथा इनका सबसे प्रसिद्ध उपन्यासकार जिसने इनको प्रसिद्धि दिलाई वह था “हालदार” जिसमें उन्होंने कुमाऊं के कौटुंबिक जीवन का यथार्थ चित्रण किया है। गरीबी और अभाव उनके जीवन में सक्रिय रहे, जिससे उन्हें शिक्षा की राह बनाने में चुनौतियां मिलीं। उन चुनौतियों ने ही उनकी लेखनी में आत्मीयता और समाज के दुखों की समझ जगाई।
साहित्य में योगदान
उन्होंने 30 से अधिक उपन्यास, 28 से ज्यादा कहानी संग्रह, 7 लोककथा संग्रह, और 16 से अधिक बाल साहित्य की पुस्तकें लिखीं। लोकप्रिय रचनाएँ: “रामकली”, “सूर्यास्त कोसी”, “मेयमूद”, “अर्धांगिनी”, और “यदा-कदा”। उनकी कहानियाँ आम लोगों की ज़िंदगी की यथार्थता को समाज के सामने लायीं, इसलिए उन्हें हिंदी का “जनकथाकार” कहा जाता है।
सम्मान और उपलब्धियाँ
1994: कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल द्वारा डी.लिट. (मानद) उपाधि।
2000: महापंडित राहुल सांकृत्यायन सम्मान।
2001 (24 अप्रैल): दिल्ली में निधन।
बाद में मध्य प्रदेश सरकार ने उनकी याद में “शैलेश मटियानी स्मृति कथा पुरस्कार” शुरू किया
इनके नाम पर क्यों पुरस्कार?
उनका लेखन समाज के हर तबके से जुड़ा था—शिक्षक भी समाज के निर्माणकर्ता होते हैं। अपने स्वयं के संघर्षों में उन्होंने शिक्षा की महत्ता को समझने और बताते रहने का काम किया।
उनकी कहानियाँ प्रेरणादायक थीं—जैसे एक शिक्षक कक्षा में छात्रों को मार्गदर्शित करता है, वैसे ही मटियानी ने कागज़ पर किया। शिक्षा और साहित्य के बीच उनका नाम यह संदेश देता है कि दोनों की शक्ति समाज के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण है।
राज्य शैक्षिक पुरस्कार की शुरुआत
उन्हीं की विरासत को सम्मानित करते हुए उत्तराखंड सरकार ने 2009 में “शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार” की शुरूआत की।
- पुरस्कार में शामिल: प्रशस्ति पत्र, ₹25,000 नकद, और सेवा विस्तार (विकल्पानुसार)।
- श्रेणियाँ: प्रारंभिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, प्रशिक्षण संस्थान, और संस्कृत शिक्षा।
- हर वर्ष शिक्षक दिवस (5 सितंबर) पर राजभवन में राज्यपाल द्वारा सम्मानित किया जाता है।
मटियानी की विरासत और पुरस्कार की महत्ता
शैलेश मटियानी सिर्फ लेखक नहीं थे—they were visionaries of humanism। जिन्होंने समाज के भीतर की वास्तविकता को शब्दों में जीवंत किया। अब उनके नाम पर यह पुरस्कार शिक्षकों को प्रेरित करता है—कि शिक्षा भी साहित्य की तरह समाज में बदलाव ला सकती है।
शैलेश मटियानी एक जनकथाकार थे, जिन्होंने साहित्य और शिक्षा को एक दृष्टि से जोड़ा। 5 सितंबर को जब 16 शिक्षक उनके नाम पर सम्मानित होंगे, तो यह सिर्फ सम्मान का पल नहीं होगा, बल्कि एक मजबूत संदेश होगा—कि शिक्षा और साहित्य, दोनों मिलकर समाज की आत्मा को सशक्त बनाते हैं।
2025 में सम्मानित होने वाले 16 शिक्षक (शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार-2024)
मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार से सम्मानित होने वाले शिक्षकों के नाम की घोषणा शासन ने 10 मार्च, 2025 को की थी। पुरस्कार पाने वाले 13 शिक्षकों में से छह महिला शिक्षिकाएं हैं। शिक्षक दिवस के अवसर पर राजभवन सभागार में आयोजित सम्मान समारोह में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के हाथों शिक्षक सम्मानित होंगे।
1. डॉ. योगेंद्र प्रसाद गौड़ – जूनियर हाई स्कूल, लालढांग (पौड़ी)
2. रम्भा शाह – प्राथमिक विद्यालय, मरोड़ा, गैरसैंण (चमोली)
3. मुरारी लाल राणा – आदर्श प्राथमिक विद्यालय, बड़ेथी (उत्तरकाशी)
4. ठाट सिंह – उच्चतर प्राथमिक विद्यालय, झबरेड़ी कला (हरिद्वार)
5. रजनी ममगाईं – प्राथमिक विद्यालय, मुनिकीरेती
6. मिली बागड़ी – उच्चतर प्राथमिक विद्यालय, पौठी (रुद्रप्रयाग)
7. नरेश चंद्र – उच्चतर प्राथमिक विद्यालय, पासम (लोहाघाट)
8. दीवान सिंह कठायत – आदर्श प्राथमिक विद्यालय, उड़ियारी (बेरीनाग)
9. डॉ. विनीता खाती – उच्चतर प्राथमिक विद्यालय, गाड़ी (ताड़ीखेत)
10. पुष्कर सिंह नेगी – जनता इंटर कॉलेज
11. गीतांजली जोशी – इंटर कॉलेज, डुंडा उत्तरकाशी
12. डॉ. सुनीता भट्ट – प्राचार्य, राजीव गांधी नवोदय विद्यालय, देहरादून
13. प्रकाश चंद्र उपाध्याय – इंटर कॉलेज, बापरू (चंपावत)
14. दीपक चंद्र बिष्ट – इंटर कॉलेज, शेर (ताड़ीखेत, अल्मोड़ा)
15. राजेश कुमार पाठक – प्रवक्ता, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, डीडीहाट
16. डॉ. बलदेव प्रसाद चमोली – प्रवक्ता, ऋषिकुल विद्यापीठ, हरिद्वार




