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मेडिकल शिक्षा घोटाले पर सरकार सख्त, विशेष जांच समिति गठित

राज्य सरकार पूर्व में लगा चुकी है ₹97 करोड़ का जुर्माना 

 गौतम बुद्ध चिकित्सा महाविद्यालय का है मामला 

देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी एक बार फिर मेडिकल शिक्षा के बड़े घोटाले से हिल गई है। गौतम बुद्ध चिकित्सा महाविद्यालय, जिसे महायान थेरवाद वज्रयान ट्रस्ट (MTVT ट्रस्ट) संचालित करता है, पर वित्तीय और शैक्षणिक अभिलेखों में गंभीर अनियमितताओं और धोखाधड़ी के आरोप सामने आए हैं। राज्य सरकार इस संस्थान पर ₹97 करोड़ का जुर्माना पहले ही लगा चुकी है, जबकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से पूर्व में सुभारती मेडिकल कॉलेज सील हुआ था और छात्रों को अन्य कॉलेजों में भेजना पड़ा, जिससे राज्य पर ₹133 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ा।

आरटीआई से सामने आए दस्तावेजों से पता चला है कि कॉलेज ने अनिवार्य निरीक्षण के बजाय केवल शपथपत्रों के आधार पर अनुमति प्राप्त की और पूर्व जांच समिति ने भी मामले को सतही तौर पर निपटाते हुए गंभीर अनियमितताओं को नजरअंदाज कर दिया। इसी बीच, 24 फरवरी 2025 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून ने विस्तृत रिपोर्ट पुलिस महानिरीक्षक गढ़वाल परिक्षेत्र को भेजी, जिसमें साफ कहा गया कि यह प्रकरण भूमि, बैंक फाइनेंसिंग, झूठे शपथपत्र और छात्रों से धोखाधड़ी से जुड़ा है।

अब शासन ने इस गंभीर मामले में सीधे हस्तक्षेप करते हुए 21 अगस्त 2025 को विशेष जांच समिति गठित कर तत्काल रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।

इधर, प्रभावित एमबीबीएस छात्र और उनके अभिभावक आक्रोशित हैं। वे घोटाले की जांच सीबीआई और ईडी से कराने, दोषियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज करने और राज्य पर पड़े वित्तीय बोझ की वसूली सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला केवल शिक्षा जगत की साख ही नहीं बल्कि छात्रों के भविष्य और राज्य की आर्थिक स्थिति पर भी गहरा आघात है।

 

 

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