ऐतिहासिक भद्रराज मेले में उमड़ा आस्था का सैलाब
मसूरी से 12 किलोमीटर दूर दूधली गांव के पास स्थित है मंदिर

मसूरी ,18 अगस्त: मसूरी से कुछ ही दूरी पर स्थित भद्राज मंदिर में ऐतिहासिक भद्राज मेले का भव्य आयोजन किया गया। भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम को समर्पित यह प्राचीन मंदिर धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक धरोहर का अद्भुत प्रतीक माना जाता है। खराब मौसम के बावजूद आस्था से ओतप्रोत हजारों श्रद्धालु मेले में पहुंचे और ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच भद्राज देवता की विधिवत पूजा-अर्चना कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
भादराज मंदिर मसूरी से लगभग 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित दूधली गांव के समीप है। यह मंदिर लगभग 7500 फीट की ऊंचाई पर है। ऐसी मान्यता है कि दुधली पहाड़ी पर पछुवादून और जौनपुर की सिलगांव पट्टी के ग्रामीण चौमासे में अपने पशुओं को लेकर चले जाते थे लेकिन पहाड़ी पर एक राक्षस उनके पशुओं को खा जाता था. मवेशी पालकों को भी परेशान करता था, जिस पर ग्रामीण भगवान बलराम के पास सहायता के लिए पहुंचे. बलराम ने ग्रामीणों को मायूस नहीं किया और पहाड़ी पर जाकर राक्षस का अंत कर, चरवाहों के साथ लंबे समय तक पशुओं को चराया. इसलिए ग्रामीणों ने भगवान बलराम का मंदिर यहां पर बनाकर उनकी पूजा शुरू की गई, जो आज भी जारी है. ऐसी मान्यता है कि भगवान बलभद्र आज भी उनके पशुओं की रक्षा करते हैं. श्रद्धालु यहां भगवान बलराम को दूध मक्खन और घी का भोग लगाते हैं।
भगवान कृष्ण के बड़े भाई भगवान बलराम को समर्पित है मंदिर
एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार यह मंदिर भगवान कृष्ण के बड़े भाई भगवान बलराम को समर्पित है. यहां भद्राज के रूप में बलराम जी की पूजा होती है.भगवान भद्राज को पछवादून ,मसूरी ,और जौनसार क्षेत्र के पशुपालकों का देवता माना जाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार द्वापर युग में जब भगवान बलराम, ऋषि वेश में इस क्षेत्र से निकल रहे थे तब उस समय इस क्षेत्र में पशुओं की भयानक बीमारी फैली हुई थी. ऋषि को उनके क्षेत्र से निकलते देख, लोगो ने उन्हें रोक लिया और पशुओं को ठीक करने का निवेदन करने लगे. तब बलराम जी ने उनके पशुओं को ठीक कर दिया. माना जाता है कि उन्होंने लोगों को आशीर्वाद दिया कि कलयुग में में वह मंदिर में भद्राज देवता के नाम से निवास करेंगे.




