विंटेज कार रैली से गूंजा दून, जौनसारी लोकनृत्य और नवाबी अंदाज ने मोहा मन

विरासत महोत्सव में 28 विंटेज कारों और 51 दोपहिया वाहनों ने लिया हिस्सा, टीएम कृष्णा की कर्नाटक संगीत प्रस्तुति ने बांधा समां
देहरादून। विरासत महोत्सव-2026 में रविवार को विंटेज कार और बाइक रैली से लेकर लोकनृत्य और शास्त्रीय संगीत तक, संस्कृति के विविध रंग देखने को मिले। पुराने दौर की 28 कारों और 51 दोपहिया वाहनों ने दून की सड़कों पर अपनी चमक बिखेरी। वहीं, जौनसार-बावर के पारंपरिक लोकनृत्यों, लखनऊ की नवाबी तहजीब और कर्नाटक संगीत की प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया।
विंटेज वाहन रैली को विरासत आयोजन समिति की उपाध्यक्ष सुनेना अग्रवाल और हिमालया वेलनेस कंपनी के चेयरमैन डॉ. एस. फारूक ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। रैली हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र, नींबूवाला से शुरू होकर सेवन ओक्स स्कूल, पुराने विरासत स्थल, ओएनजीसी, किशननगर, चकराता रोड, बिंदाल और घंटाघर होते हुए वापस आयोजन स्थल पहुंची।
ऐतिहासिक कारों और स्कूटर-बाइकों को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे। खासकर युवाओं में इन वाहनों के साथ सेल्फी लेने का उत्साह दिखाई दिया।
सांस्कृतिक संध्या में लोक सोर संगम के 20 सदस्यीय दल ने देवेंद्र रावत के निर्देशन में जौनसार-बावर की समृद्ध लोक संस्कृति पेश की। महासू वंदना से शुरू हुई प्रस्तुति का समापन नाटी नृत्य के साथ हुआ।
इस दौरान पारंपरिक तांडी नृत्य ने भी दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। लोकगीतों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के संगम ने उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत की खूबसूरत झलक पेश की।
इसके बाद कृष्ण मोहन की कोरियोग्राफी और निर्देशन में ‘बहार-ए-लखनऊ’ की प्रस्तुति ने नवाबी तहजीब, अदब और मुगलकालीन सांस्कृतिक परंपराओं को मंच पर जीवंत किया। सूफी कलाम, गजल, तराना और सलामी के जरिए वाजिद अली शाह के दौर के लखनऊ की झलक दिखाई गई।
वहीं, प्रसिद्ध कर्नाटक संगीतकार टीएम कृष्णा ने राग कीरावानी से अपनी प्रस्तुति की शुरुआत की। स्वरनलता ने वायलिन और ए. रोहित ने मृदंगम पर संगत की। सुरों की गहराई और कलाकारों की शानदार जुगलबंदी ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। टीएम कृष्णा को वर्ष 2016 में प्रतिष्ठित रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।




