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सुरों की महफिल और छोलिया नृत्य से सजी विरासत-2026 की पहली शाम

मुख्य सचिव आनंद वर्धन ने हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र में किया महोत्सव का शुभारंभ, पंडित साजन मिश्रा की गायकी ने बांधा समां

देहरादून। उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, भारतीय शास्त्रीय संगीत और हस्तशिल्प की झलक के साथ विरासत आर्ट एंड हेरिटेज फेस्टिवल-2026 का शुक्रवार को हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र, नींबूवाला में भव्य शुभारंभ हुआ। मुख्य सचिव आनंद वर्धन ने दीप प्रज्वलित कर महोत्सव का उद्घाटन किया। इस अवसर पर रिच संस्था के संस्थापक एवं अध्यक्ष आरके सिंह, संयुक्त सचिव विजय श्रीजोशी और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी समीर सिन्हा मौजूद रहे।

छोलिया नृत्य ने दिखाई उत्तराखंड की लोकसंस्कृति

महोत्सव की पहली सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत उत्तराखंड के पारंपरिक छोलिया नृत्य से हुई। चंदन बोहरा के नेतृत्व में छोलिया डांस ग्रुप के कलाकारों ने तलवारों के साथ युद्ध शैली पर आधारित नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को कुमाऊं की समृद्ध लोकपरंपरा से रूबरू कराया। कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा, तलवारों की खनक और युद्ध शैली पर आधारित नृत्य से उत्तराखंड की समृद्ध लोकपरंपरा को मंच पर जीवंत कर दिया। छोलिया कुमाऊं क्षेत्र का प्रसिद्ध पारंपरिक तलवार नृत्य है, जिसे विवाह समारोहों और अन्य मांगलिक अवसरों पर प्रस्तुत किया जाता है। प्रस्तुति में जगमोहन आगरी, कृष्ण आर्य, गोधन राम, रमेश राम, देव राम, गोपाल सिंह, पुरव बोरा, दीवान राम, हरीश राम, खीम राम, दयाल राम, नंदन राम, महेश राम, भुवन कुमार, गंगा धामी, मीनू सुपियाल, तनुजा पाठक और गिरीश कुमार सहित अन्य कलाकार शामिल रहे।

पंडित साजन मिश्रा की गायकी ने मोहा मन

शाम का प्रमुख आकर्षण पद्म भूषण से सम्मानित शास्त्रीय गायक पंडित साजन मिश्रा और उनके पुत्र स्वरांश मिश्रा की प्रस्तुति रही। बनारस घराने की शास्त्रीय संगीत परंपरा से सजी इस प्रस्तुति में अभिषेक मिश्रा ने तबले और पंडित धर्मनाथ मिश्रा ने हारमोनियम पर संगत की। गायन, तबले और हारमोनियम के बेहतरीन तालमेल ने श्रोताओं को सुरों की खूबसूरत दुनिया में पहुंचा दिया। मंच पर सुरों के साथ प्रस्तुति का सहज विस्तार संध्या की खास विशेषता रहा।

खरीदारी और जायकों का भी आकर्षण

विरासत महोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ खरीदारी और खानपान का भी खास आकर्षण रहा। फूड कोर्ट में लोगों ने विभिन्न व्यंजनों का स्वाद लिया, वहीं आकर्षक परिधानों, मखमली शॉल और अन्य हस्तशिल्प उत्पादों की खरीदारी भी की। लोककला, संगीत, पारंपरिक उत्पादों और खानपान के संगम ने महोत्सव के पहले दिन को खास बनाया।

 

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