
देहरादून। देहरादून सिटीजन फोरम (डीसीएफ) की ओर से दून लाइब्रेरी में आयोजित टाउनहॉल में शहर की व्यवस्थाओं को लेकर जनता और अधिकारियों के बीच खुला संवाद हुआ। कार्यक्रम में जिला प्रशासन समेत सात विभागों के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। नागरिकों ने ट्रैफिक जाम, अतिक्रमण, पार्किंग, कचरा प्रबंधन और प्रदूषण जैसे मुद्दों पर सवाल पूछे और कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए। कई बार सवाल इतने तीखे रहे कि अधिकारी असहज नजर आए।

कार्यक्रम की शुरुआत फोरम के जगमोहन मेहंदीरत्ता ने की। उन्होंने शहर की समस्याओं और उनके समाधान के लिए ठोस पहल न होने पर चिंता जताई। भारती जैन और फ्लोरेंस पांधी ने फोरम की दो वर्षों की गतिविधियों का विवरण देते हुए ग्रीन एजेंडा, रोड सेफ्टी, महिला सुरक्षा, कचरा प्रबंधन और एलिवेटेड रोड जैसे अभियानों का उल्लेख किया।

रमना कुमार ने पीपीटी के माध्यम से ट्रैफिक लाइट, फुटपाथों पर अतिक्रमण, सहस्रधारा रोड की अव्यवस्था और शहर में जगह-जगह लगे कूड़े के ढेरों की समस्या उठाई। अनूप नौटियाल ने सवाल किया कि शहर की योजनाएं बनाते समय नागरिकों की राय क्यों नहीं ली जाती।
परिवहन विभाग के शैलेश तिवारी ने बताया कि जल्द 100 नई इलेक्ट्रिक बसें और ई-रिक्शा सेवा बढ़ाई जाएगी। नगर निगम के डॉ. अविनाश खन्ना ने कचरा उठान व्यवस्था को और मजबूत करने की बात कही। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के डॉ. अंकुर कंसल ने जाम और बार-बार सड़क खोदे जाने से बढ़ते प्रदूषण पर चिंता जताई।
ट्रैफिक पुलिस, एमडीडीए और पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने जाम से निपटने, पौधारोपण और एलिवेटेड रोड की योजनाओं की जानकारी दी। अंत में अधिकारियों को विभिन्न विभागों से जुड़े मांग पत्र सौंपे गए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नागरिक, युवा और ग्राफिक ऐरा यूनिवर्सिटी के छात्र शामिल हुए और इस पहल को सकारात्मक बताया।



