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विज्ञान और संस्कृत के समन्वय से ही वेद ज्ञान का संरक्षण संभव:. निशंक

देश के पहले लेखक गांव में तीन दिवसीय वैदिक संगोष्ठी शुरू

देहरादून
देश के पहले लेखक गांव में शुक्रवार को महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान, उज्जैन तथा नालंदा पुस्तकालय शोध एवं अनुसंधान केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में तीन दिवसीय अखिल भारतीय वैदिक संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। उद्घाटन समारोह लेखक गांव के सभागार में आयोजित किया गया, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।

डॉ. निशंक ने कहा कि विज्ञान और संस्कृत का समन्वय वेदों और ज्ञान के संरक्षण की कुंजी है। उन्होंने कहा कि संस्कृत, कंप्यूटर और विज्ञान तीन अलग-अलग क्षेत्र हैं, पर जब ये एक साथ काम करेंगे तभी भारत पुनः विश्वगुरु बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर भी विचार साझा करते हुए कहा कि “एआई हमारे लिए चुनौती भी है और अवसर भी। जितनी बड़ी चुनौती होती है, उससे लड़ने पर उतनी ही बड़ी सफलता मिलती है।”

महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान के संयुक्त निदेशक ने संस्थान की कार्यप्रणाली और उद्देश्यों का परिचय देते हुए कहा कि उत्तराखंड में भी प्रतिष्ठान की शाखा खोलने की योजना है, जो राज्य सरकार के सहयोग से संभव होगी।

डॉ. राजेश नैथानी ने कहा कि विज्ञान प्रक्रिया के “कैसे होने” का उत्तर खोजता है, जबकि वेद और अध्यात्म “क्यों हुई” का उत्तर देते हैं। वहीं मुख्य वक्ता प्रो. प्रदीप राय ने पुस्तकालय के पांच सूत्रों को समझाते हुए ज्ञान और साहित्य संरक्षण में पुस्तकालयों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण के महत्व को भी रेखांकित किया।

संगोष्ठी के आगामी सत्रों में देशभर से आए विद्वान वैदिक ज्ञान, आधुनिक विज्ञान और संस्कृति के समन्वय पर अपने शोधपत्र प्रस्तुत करेंगे।

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