
देहरादून। नगर निगम देहरादून की स्वच्छता समितियों में करोड़ों रुपये के वेतन घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि शहर के 100 में से 31 वार्डों में लंबे समय तक फर्जी कर्मचारियों के नाम पर वेतन जारी कर करोड़ों की बंदरबांट की गई।
तीन माह पूर्व दर्ज हुई थी तहरीर
करीब तीन माह पहले निगम के उप नगर आयुक्त (विधि) गौरव भसीन ने शहर कोतवाली में तहरीर दी थी। तहरीर के अनुसार, पिछले वर्ष भौतिक सत्यापन के दौरान 99 कर्मचारी मौके पर अनुपस्थित पाए गए, जबकि उनके नाम पर लगातार वेतन जारी होता रहा। समिति के सचिव, अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष द्वारा दिए गए सत्यापन को निगम ने बिना क्रॉस-वेरिफिकेशन मान्य कर दिया।
नियमों को दरकिनार कर समिति को दिया गया वेतन
सरकारी प्रक्रिया के मुताबिक कर्मचारियों का वेतन सीधे बैंक खाते में डीबीटी से जाना चाहिए था। लेकिन जून 2019 से नियम बदल दिए गए और वेतन की पूरी राशि सीधे स्वच्छता समितियों को दे दी गई। समिति ने कर्मचारियों की सूची दी और निगम ने एकमुश्त भुगतान कर दिया। इस दौरान न तो वेतन का क्रॉस-वेरिफिकेशन हुआ और न ही यह देखा गया कि पैसा सफाईकर्मियों तक पहुंचा भी या नहीं। अधिवक्ता विकेश नेगी की ओर से अदालत में याचिका दाखिल होने के बाद ही निगम ने पुलिस से शिकायत की, जबकि फर्जीवाड़ा करीब डेढ़ साल पहले सामने आ चुका था।
इन 31 वार्डों में चला फर्जीवाड़ा
वार्ड-1 मालसी, वार्ड-6 दून विहार, वार्ड-11 विजय कॉलोनी, वार्ड-35 श्रीदेव सुमन, वार्ड-37 वसंत विहार, वार्ड-38 पंडितवाड़ी, वार्ड-39 इंद्रा नगर, वार्ड-42 कांवली, वार्ड-50 राजीव नगर, वार्ड-63 लाडपुर, वार्ड-64 नेहरूग्राम, वार्ड-66 रायपुर, वार्ड-67 मोहकमपुर, वार्ड-68 चक तुनवाला-मियांवाला, वार्ड-75 लोहिया नगर, वार्ड-77 माजरा, वार्ड-79 भारूवाला ग्रांट, वार्ड-84 बंजारावाला, वार्ड-85 मोथरोवाला, वार्ड-87 पित्थूवाला, वार्ड-88 मेहूंवाला-1, वार्ड-89 मेहूंवाला-2, वार्ड-92 आरकेडिया-1, वार्ड-93 आरकेडिया-2, वार्ड-94 नत्थनपुर-1, वार्ड-95 नत्थनपुर-2, वार्ड-96 नवादा, वार्ड-97 हर्रावाला, वार्ड-98 बालावाला, वार्ड-99 नकरौंदा और वार्ड-100 नथुवावाला।
राजनीतिक गलियारों में हलचल
इस घोटाले ने न केवल नगर निगम प्रशासन बल्कि राजनीतिक हलकों में भी खलबली मचा दी है। जिन वार्डों में फर्जीवाड़ा सामने आया है, उनमें भाजपा और कांग्रेस दोनों के दिग्गज पार्षद मौजूद रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मामले का असर नगर निगम की राजनीति पर गहराई से पड़ने की संभावना है।
पुलिस जांच जारी है और नगर निगम स्तर पर भी जिम्मेदारों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।



