देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन ‘नमो ग्रीन रेल’ जल्द दौड़ेगी पटरियों पर
पर्यावरण के अनुकूल रेल परिवहन की दिशा में बड़ा कदम
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने साझा किया वीडियो

नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने पर्यावरण के अनुकूल परिवहन की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए देश की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन तैयार कर ली है। इस ट्रेन को ‘नमो ग्रीन रेल’ नाम दिया गया है, जिसकी पहली झलक रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा की। उन्होंने वीडियो के साथ लिखा— “भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन! जल्द आ रही है…”।
चेन्नई में तैयार, हरियाणा में होगा ट्रायल
यह ट्रेन चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में विकसित की गई है। इसे डीजल इंजन को हाइड्रोजन इंजन में बदलकर बनाया गया है। हाइड्रोजन ट्रेन के इस प्रोजेक्ट के लिए रेलवे ने अपने 1600 हार्सपावर के दो डीजल इंजनों को 1200 हार्सपावर के हाइड्रोजन इंजन में बदला है। इसमें दस डिब्बे और दो इंजन हैं। रेलवे के अनुसार, इसका पहला ट्रायल रन हरियाणा के जिंद–सोनीपत रूट (करीब 89 किमी) पर किया जाएगा। इस ट्रायल के दौरान ट्रेन में उतना ही वजन रख कर दौड़ाया जाएगा, जितने वजन के पैसेंजर्स उसमें चढ़ेंगे। वजन डालने के लिए प्लस्टिक के पीपे में मेटल पाउडर डाल कर 50-50 किलो का वजन बनाया गया है। उल्लेखनीय है कि रेल ऑपरेशन में हाइड्रोजन को उपलब्ध फ्यूल में से सबसे स्वच्छ इंधन माना जाता है। इससे जीरो इमिशन होता है। जबकि जीवाश्म इंधन के बर्न होने से वातावरण में कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन होता है जो कि वातावरण के लिए घातक है।
तकनीकी विशेषताएं
क्षमता : लगभग 2,638 यात्री (8 कोच)
पावर : 1,200 हॉर्सपावर
अधिकतम रफ्तार : 110 किमी/घंटा
ऊर्जा स्रोत : हाइड्रोजन ईंधन सेल, जिससे शून्य कार्बन उत्सर्जन होगा
निर्माण लागत : लगभग ₹80 करोड़ प्रति ट्रेन
रूट इंफ्रास्ट्रक्चर लागत: लगभग ₹70 करोड़
‘Hydrogen for Heritage’ योजना के तहत पहल
भारतीय रेलवे “Hydrogen for Heritage” योजना के अंतर्गत 35 हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने की योजना पर काम कर रहा है। इन्हें विशेष रूप से हेरिटेज और पहाड़ी रूट्स पर उतारा जाएगा। इसके लिए हरियाणा के जिंद में 3,000 किलो हाइड्रोजन क्षमता वाला रिफ्यूलिंग स्टेशन भी बनाया जा रहा है।
सुरक्षा मानक और जांच
ट्रेन की सुरक्षा जांच जर्मनी की अंतरराष्ट्रीय एजेंसी TUV-SUD द्वारा की जा रही है। इसमें फ्लेम और प्रेशर डिटेक्शन सेंसर, रिसाव रोकने के लिए उन्नत तकनीक और आपातकालीन सुरक्षा प्रणाली लगाई गई है।
हाइड्रोजन ट्रेन केवल जलवाष्प और गर्मी उत्सर्जित करती है, जिससे यह पूरी तरह प्रदूषण मुक्त है। ध्वनि प्रदूषण भी डीजल ट्रेनों की तुलना में काफी कम होगा। रेलवे का मानना है कि यह परियोजना 2030 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभाएगी।




