Update – बादल फटने से मची तबाही, 65 लोगों की मौत, कई लापता
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में मचैल माता यात्रा मार्ग पर मची तबाही

मृतकों में दो सीआईएसएफ जवान भी शामिल

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में मचैल माता यात्रा मार्ग पर गुरुवार दोपहर बादल फटने से भारी तबाही मच गई। चसोटी गांव में बादल फटने के बाद आई बाढ़ और मलबे में दबने से अब तक 65 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें से 21 की पहचान की जा चुकी है। अब तक 167 लोगों को बचाया गया है। इनमें से 38 की हालत गंभीर है। 500 से ज्यादा अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। यह हादसा चशोती गांव के पास उस समय हुआ जब हजारों श्रद्धालु मचैल माता मंदिर की वार्षिक यात्रा में शामिल होने के लिए पहुंच रहे थे। मृतकों में दो सीआईएसएफ जवान भी शामिल हैं।
स्थानीय प्रशासन, सेना, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें मौके पर बचाव और राहत कार्य में जुटी हुई हैं। राहतकर्मियों ने मलबे में दबे लोगों की तलाश तेज कर दी है, लेकिन दुर्गम पहाड़ी रास्तों, टूटी सड़कों और लगातार हो रही बारिश के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में दिक्कतें आ रही हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बादल फटने के बाद महज कुछ ही मिनटों में नदी-नाले उफान पर आ गए और तेज धारा श्रद्धालुओं के टेंट, लंगर और वाहन बहा ले गई। कई लोग लंगर शेड के नीचे फंसे रह गए, जिसे पानी और मलबे ने पूरी तरह नष्ट कर दिया। हादसे के समय श्रद्धालु यात्रा के पड़ाव पर ठहरे हुए थे।
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है और मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये, जबकि घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की है। उन्होंने किश्तवाड़ में सभी प्रशासनिक अधिकारियों को राहत और बचाव कार्य में युद्धस्तर पर जुटने के निर्देश दिए हैं।
किश्तवाड़ के डिप्टी कमिश्नर पंकज शर्मा ने बताया- NDRF की टीम सर्च-रेस्क्यू में जुटी है। दो और टीमें रास्ते में हैं। राष्ट्रीय राइफल के जवान भी ऑपरेशन में जुटे हैं। 60-60 जवानों के पांच ग्रुप (कुल 300), व्हाइट नाइट कोर की मेडिकल टीम, जम्मू-कश्मीर पुलिस, SDRF और अन्य एजेंसियां ऑपरेशन में जुटी हैं।
गौरतलब है कि मचैल माता यात्रा जम्मू-कश्मीर की सबसे दुर्गम धार्मिक यात्राओं में से एक है, जो किश्तवाड़ जिले के पहाड़ी इलाकों से होकर गुजरती है। मचैल माता तीर्थयात्रा हर साल अगस्त में होती है। इसमें हजारों श्रद्धालु आते हैं। यह 25 जुलाई से 5 सितंबर तक चलेगी। यह रूट जम्मू से किश्तवाड़ तक 210 किमी लंबा है और इसमें पड्डर से चसोटी तक 19.5 किमी की सड़क पर गाड़ियां जा सकती हैं। उसके बाद 8.5 किमी की पैदल यात्रा होती है। इस समय यात्रा पर भारी संख्या में श्रद्धालु आते हैं, जिससे मार्ग पर अस्थायी शिविर और लंगर लगाए जाते हैं। हादसे के बाद यात्रा को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया गया है और इलाके में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है।
इस प्राकृतिक आपदा ने इलाके में मातम का माहौल पैदा कर दिया है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि मौसम में सुधार और रास्ते साफ होने तक यात्रा स्थगित रखें और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करें।




