जन औषधि केंद्र में गड़बड़ी भारी पड़ी, लाइसेंस निरस्तीकरण की संस्तुति
रायपुर सीएचसी में अनियमितताओं का खुलासा, प्रशासन ने कसा शिकंजा

देहरादून। देहरादून में दवा माफिया पर शिकंजा कसते हुए जिला प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। जिलाधिकारी सविन बंसल की अध्यक्षता में आयोजित जनता दर्शन में प्राप्त शिकायत के बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) रायपुर स्थित प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र की जांच कर गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं।
जांच में पाया गया कि जन औषधि केंद्र संचालक बलवीर सिंह रावत द्वारा सीएचसी परिसर में जन औषधि केंद्र संचालित करने के साथ ही लगभग 25 मीटर दूरी पर “मै० रावत मेडिकोज” नाम से निजी मेडिकल स्टोर भी चलाया जा रहा था। प्रशासन ने इसे हितों के टकराव और निजी लाभ की स्थिति मानते हुए गंभीर अनियमितता करार दिया है।
संयुक्त मजिस्ट्रेट राहुल कुमार और वरिष्ठ औषधि निरीक्षक की संयुक्त टीम की जांच में सामने आया कि केंद्र पर दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए Pharmaceuticals & Medical Devices Bureau of India (PMBI) के आधिकारिक सॉफ्टवेयर का उपयोग नहीं किया जा रहा था। बिलिंग कार्य मैनुअल तरीके से किया जा रहा था, जबकि दवाओं की मांग एवं आपूर्ति प्रक्रिया नियमानुसार पोर्टल के माध्यम से संचालित करने के बजाय व्हाट्सएप के जरिए की जा रही थी।
रिपोर्ट के अनुसार, दवाओं की कमी दूर करने के लिए आवश्यक प्रयास नहीं किए गए, जिसके कारण मरीजों को सस्ती जेनेरिक दवाओं के बजाय बाहर स्थित निजी मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ा। इसके अतिरिक्त स्टॉक पंजिका और इन्वेंट्री प्रबंधन भी अव्यवस्थित पाया गया।
लाइसेंस संबंधी दस्तावेजों में भी गंभीर विसंगतियां सामने आईं। एक ही रेफ्रिजरेटर के बिल का उपयोग, एसी की कार्यशील स्थिति संबंधी गलत घोषणा और किरायानामा अवधि समाप्त होने के बाद अद्यतन अनुबंध अपलोड न किया जाना प्रमुख खामियों में शामिल हैं।
इन सभी अनियमितताओं को गंभीर मानते हुए वरिष्ठ औषधि निरीक्षक ने जनहित में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र और मै० रावत मेडिकोज के औषधि विक्रय लाइसेंस निरस्त करने की संस्तुति की है।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि गरीब और जरूरतमंद मरीजों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने की सरकारी व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और आगे भी ऐसी कार्रवाई लगातार जारी




