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गर्मी-सर्दी की छुट्टियां बराबर करने की तैयारी, साल में 16 दिन कम होंगे दीर्घ अवकाश

स्कूलों में समान अवकाश नियम पर मैदानी और पहाड़ी क्षेत्रों में विरोध

देहरादून। उत्तराखंड के विद्यालयों में अवकाश व्यवस्था को लेकर बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। नई नीति के तहत अब राज्य के सभी स्कूलों में गर्मियों और सर्दियों की छुट्टियां समान अवधि की होंगी। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो लंबे अवकाश के कुल दिनों में 16 दिन की कटौती हो जाएगी और वार्षिक पढ़ाई के दिन बढ़ाकर 200 किए जाएंगे।

क्या है प्रस्तावित बदलाव?

अब तक प्रदेश में भौगोलिक परिस्थितियों के आधार पर छुट्टियां तय होती थीं। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सर्दियों की छुट्टियां अधिक और गर्मियों की कम रहती थीं, जबकि मैदानी इलाकों में इसका उलटा प्रावधान था।

प्रस्ताव के अनुसार—

  • गर्मी की छुट्टियां: 15 जून से 30 जून (16 दिन)
  • सर्दी की छुट्टियां: 1 जनवरी से 16 जनवरी (16 दिन)
  • इस बदलाव के बाद कुल दीर्घकालीन अवकाश 48 दिनों से घटकर 32 दिन रह जाएंगे।

माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती के अनुसार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप नया शैक्षणिक कैलेंडर तैयार किया जा रहा है, जिसमें वर्षभर में न्यूनतम 200 कार्यदिवस सुनिश्चित करने का लक्ष्य है। फिलहाल स्कूलों को औसतन 184 दिन ही पढ़ाई के लिए मिल पाते हैं। जिलों से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं, जिनके आधार पर अंतिम प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।

पर्वतीय क्षेत्रों में बढ़ी चिंता

नई व्यवस्था को लेकर सबसे अधिक चिंता पहाड़ी जिलों में जताई जा रही है। वहां दिसंबर के अंतिम सप्ताह से फरवरी तक कड़ाके की ठंड, भारी वर्षा और बर्फबारी आम बात है। ऐसे में छात्रों के लिए स्कूल पहुंचना जोखिम भरा हो जाता है।

स्थानीय अभिभावकों का कहना है कि जनवरी माह में मौसम की मार अपने चरम पर होती है। पिछले वर्षों की तरह इस बार भी जनवरी के अंतिम सप्ताह से लेकर फरवरी के आरंभ तक बारिश और बर्फबारी ने जनजीवन प्रभावित किया था। ऐसे हालात में अवकाश अवधि घटाना बच्चों की सुरक्षा पर असर डाल सकता है।

मैदानी क्षेत्रों की अलग मांग

दूसरी ओर, मैदानी जिलों के अभिभावक जून माह में एक माह का ग्रीष्म अवकाश बनाए रखने की वकालत कर रहे हैं। उनका तर्क है कि भीषण गर्मी और लू के कारण छात्रों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। वहीं कुछ अभिभावक सर्दियों में भी लंबा अवकाश देने के पक्षधर हैं।

वार्षिक कैलेंडर का गणित

शिक्षा विभाग के वार्षिक टाइम टेबल के अनुसार कुल 251 कार्यदिवस निर्धारित होते हैं। इनमें—

  • 30 दिन परीक्षा व मूल्यांकन,
  • 10 दिन बस्ता रहित गतिविधियां,
  • 11 दिन आपदा, कांवड़ मेला आदि के लिए आरक्षित,
  • इन सबके बाद वास्तविक शिक्षण दिवस 200 निर्धारित किए जा रहे हैं।
  • शिक्षकों और अभिभावकों में नाराजगी

छुट्टियों में कटौती और एकरूपता के प्रस्ताव को लेकर शिक्षकों व अभिभावकों के एक वर्ग में असंतोष देखा जा रहा है। उनका कहना है कि राज्य की भौगोलिक विविधता को ध्यान में रखे बिना एक समान नीति लागू करना व्यवहारिक नहीं होगा।

अब देखना होगा कि जिलों से प्राप्त सुझावों के बाद सरकार इस प्रस्ताव में क्या संशोधन करती है और अंतिम रूप कब तक दिया जाता है।

 

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