
मतगणना 22 नवंबर को , पंचायत उपचुनाव से लौटेगी गांवों में सक्रियता
देहरादून। उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायतों के हजारों खाली पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। राज्य निर्वाचन आयोग ने उपचुनाव की अधिसूचना जारी कर दी है। हरिद्वार को छोड़कर राज्य के सभी 12 जिलों में मतदान कराया जाएगा। आयोग के अनुसार, मतदान 20 नवंबर को होगा और मतगणना 22 नवंबर को पूरी की जाएगी। अधिसूचना जारी होते ही संबंधित क्षेत्रों में आदर्श आचरण संहिता लागू हो गई है, जो मतगणना संपन्न होने तक प्रभावी रहेगी।
32 हजार से अधिक पद रिक्त
अगस्त–सितंबर में हुए पंचायत चुनावों के बाद राज्यभर में कई पद रिक्त रह गए थे। अब निर्वाचन आयोग ने इन खाली पदों को भरने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
राज्य में ग्राम पंचायत सदस्य के 32,934 पद खाली हैं, जबकि ग्राम प्रधान के 22, क्षेत्र पंचायत सदस्य के 2 और जिला पंचायत सदस्य का 1 पद रिक्त है।
रुद्रप्रयाग में जिला पंचायत सदस्य का एक पद खाली है, वहीं उत्तरकाशी और चमोली में क्षेत्र पंचायत सदस्य के एक-एक पद पर उपचुनाव होंगे। आयोग ने कहा है कि सभी जिलों में शांतिपूर्ण और पारदर्शी चुनाव कराए जाएंगे।
उपचुनाव कार्यक्रम एक नजर में
प्रक्रिया तिथि / समय
नामांकन दाखिल करने की तिथि 13 और 14 नवंबर (सुबह 10 से शाम 5 बजे तक)
नामांकन पत्रों की जांच 15 नवंबर
नाम वापसी की अंतिम तिथि 16 नवंबर (दोपहर 3 बजे तक)
चुनाव चिन्ह आवंटन 16 नवंबर (दोपहर बाद)
मतदान 20 नवंबर (सुबह 8 से शाम 5 बजे तक)
मतगणना 22 नवंबर (सुबह 8 बजे से कार्य समाप्ति तक)
नामांकन शुल्क और चुनाव खर्च सीमा
निर्वाचन आयोग ने नामांकन शुल्क और खर्च की सीमा भी तय की है —
ग्राम पंचायत सदस्य:
शुल्क: ₹150 (सामान्य), ₹75 (आरक्षित वर्ग/महिला)
अधिकतम खर्च सीमा: ₹10,000
ग्राम प्रधान / क्षेत्र पंचायत सदस्य:
शुल्क: ₹300 (सामान्य), ₹150 (आरक्षित वर्ग/महिला)
अधिकतम खर्च सीमा: ₹75,000
जिला पंचायत सदस्य:
अधिकतम खर्च सीमा: ₹2,00,000
इन जिलों में होंगे उपचुनाव
उपचुनाव राज्य के 12 जिलों में होंगे, जिनमें कुल हजारों पद भरे जाएंगे।
जिला रिक्त पदों की संख्या
अल्मोड़ा 6241
पौड़ी 6068
टिहरी 4170
पिथौरागढ़ 2927
चमोली 2812
उत्तरकाशी 1961
बागेश्वर 1610
रुद्रप्रयाग 1436
नैनीताल 2268
चंपावत 1702
ऊधमसिंह नगर 938
देहरादून 801
निर्वाचन आयोग की तैयारी
राज्य निर्वाचन आयुक्त सुशील कुमार ने बताया कि जहां मतदान की आवश्यकता नहीं होगी, वहां पोलिंग पार्टियों को भेजने से पहले स्थिति स्पष्ट की जाएगी। कई ग्राम पंचायतों में निर्विरोध निर्वाचन की संभावना भी जताई गई है। आयोग ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही पोलिंग पार्टियों की नियुक्ति आदेश जारी करें। यह उपचुनाव न केवल ग्रामीण स्तर पर प्रशासनिक गतिशीलता को बहाल करेगा, बल्कि पंचायतों में जनसहभागिता और जवाबदेही को भी पुनर्जीवित करने का अवसर बनेगा। ग्रामीण विकास की दिशा में यह चुनाव एक नया सशक्त अध्याय जोड़ सकता है।




