
निचली अदालत और हाईकोर्ट ने सुनाई थी आरोपी को फांसी की सजा, सुप्रीम कोर्ट ने किया बरी
देहरादून। उत्तराखंड में 2014 के बहुचर्चित ‘नन्ही परी’ मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट से मुख्य आरोपी को बरी किए जाने के फैसले के बाद प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। महिला कांग्रेस, यूथ कांग्रेस और एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं ने देहरादून में कांग्रेस भवन से घंटाघर तक कैंडल मार्च निकालकर पीड़िता को श्रद्धांजलि अर्पित की और न्याय की मांग की। विभिन्न सामाजिक संगठनों, युवाओं और महिलाओं ने भी इस फैसले को पीड़ादायक बताते हुए कड़ी आपत्ति दर्ज की है।
मुख्यमंत्री का सख्त रुख
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले को लेकर गंभीरता दिखाते हुए न्याय विभाग को सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि निचली अदालत और हाईकोर्ट से दोषी ठहराए गए आरोपी को अब सर्वोच्च न्यायालय से राहत मिलना न्याय व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। सरकार इस प्रकरण की मजबूती से पैरवी करेगी और इसके लिए बेहतर से बेहतर कानूनी टीम नियुक्त की जाएगी। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि देवभूमि में बेटियों के साथ अपराध करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और न्याय की इस लड़ाई में सरकार पूरी तरह पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है।
यह है घटनाक्रम
20 नवंबर 2014 को पिथौरागढ़ की सात वर्षीय बच्ची काठगोदाम में एक शादी समारोह से लापता हो गई थी। छह दिन बाद उसका शव गौला नदी से बरामद हुआ। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दुष्कर्म और हत्या की पुष्टि हुई। इसके बाद मुख्य आरोपी अख्तर अली को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया। 2016 में निचली अदालत ने उसे फांसी की सजा सुनाई, जिसे 2019 में हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा। लेकिन हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को बरी कर दिया, जिसके बाद राज्य में आक्रोश फैल गया।
जनता की मांग
विरोध करने वाले संगठनों का कहना है कि ऐसे मामलों में किसी भी तरह की नरमी समाज के लिए गलत संदेश देती है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से इस फैसले पर पुनर्विचार करने और दोषियों को कठोर सजा दिलाने की मांग उठाई। साथ ही यह भी कहा गया कि सरकार बेटियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बनाए और न्याय व्यवस्था में जनता का विश्वास कायम रखा जाए




